GLIBS

प्रिंसिपल कमिश्नर सेन्ट्रल जीएसटी से कैट के पदाधिकारियों ने की मुलाकात

रविशंकर शर्मा  | 19 Feb , 2020 10:44 PM
प्रिंसिपल कमिश्नर सेन्ट्रल जीएसटी से कैट के पदाधिकारियों ने की मुलाकात

रायपुर। कॉनफेडरेशन ऑफ ऑफ़ इंड़िया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सेन्ट्रल जीएसटी के प्रिंसिपल कमिश्नर बीबी महापात्रा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने जीएसटी रिटर्न के संबंध में ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में मुख्यरूप से मगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव,परमानन्द जैन, सुरिन्द्रर सिंह एवं आशीष सोनी शामिल थे। अमर पारवानी ने बताया कि जीएसटी लगभग 10 वर्षो कि परिचर्चा एवं तैयारी के उपरांत लागू किया गया था। परन्तु जीएसटी लागू होने के प्रथम दो वर्षो में जीएसटी के प्रावधानों में खामियों एवं अन्य व्यवहारिक समस्याओ को दूर करने के लिए लगभग 500 से अधिक अधिसूचनाएं, सर्कुलर एवं आदेश जारी किये गए है। जीएसटी में अभी भी बहुत से सुधार की आवश्यकता है। जीएसटी का क्रियान्वयन भारत की कर प्रणाली में एक बहुत बड़ा परिवर्तन था एवं इसमें उपरोक्तानुसार निरंतर परिवर्तन किये गए, जिससे व्यावसायियो को इसे समझने एवं अपने सॉफ्टवेयर एवं व्यवसाय प्रणाली में परिवर्तन करने में कठिनाई एवं समस्याएं हुई। उपरोक्त स्थिति में त्रुटि होना स्वाभाविक है।

पारवानी ने प्रिंसिपल कमिश्नर को अवगत कराते हुए बताया कि केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड़, नई दिल्ली द्वारा प्रमुख आयुक्त/मुख्य आयुक्त को जारी पत्र क्रमांक सीबीईसी-20/16/07/2020-जीएसटी दिनांक 10/02/2020 जारी किया गया है, जिसमें केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड़ के द्वारा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है, कि जीएसटी रिर्टन विलंब से प्रस्तुत करने पर ब्याज पर कुल कर दायित्व (इनपुट टैक्स क्रेडिट समायोजन के पूर्व् राशि) पर वसूल किया जाये। जो कि केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड़ के द्वारा जारी निर्देश जीएसटी कांउसिल द्वारा लिये गये निर्णय एवं प्राकृतिक न्याय के नियम के विरूद्ध है। क्योंकि मद्रास हाईकार्ट में यह निर्णय आया था कि ब्याज की गणना शुद्ध देय राशि पर होना चाहिए, अतः उन्ही तत्थों को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य में भी ब्याज की गणना शुद्ध देय राशि पर की जानी चाहिए। अमर पारवानी ने प्रिंसिपल कमिश्नर से अनुरोध किया है कि व्यवसाय जगत वर्तमान में कठिन परिस्थिति से गुजर रहा है एवं उसे सरकार के सहयोग की आवश्यकता है परन्तु इस प्रकार के (केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड़ के द्वारा जारी) निर्देश व्यवसाय जगत की समस्याएं और बढ़ा रहे है। अमर पारवानी ने कहा कि केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड़ के द्वारा जारी निर्देश तत्काल प्रभाव से वापस लिये जाये। जीएसटी में प्रथम तीन वर्षो को ट्रांजिट अवधि में रखा जाये तथा इस अवधि में हुए विलंब के लिए ब्याज व पेनाल्टी नहीं लगाई जानी चाहिए। जीएसटी कांउसिल की 31वी बैठक दिनांक 22/12/2018 में लिये गये निर्णय को लागू किया जाये एवं ब्याज केवल शुद्व कर दायित्व (इनपुट टैक्स क्रेडिट समायोजन के पश्चात्) पर लगाया जाये।

 

Author/Journalist owns and is responsible for views/news published and the publisher/printer is in no way liable for such content.