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सीएजी की रिपोर्ट सदन में पेश, राजस्व घटा व व्यय में 2018-19 के मुकाबले 19-20 में हुई बढोत्तरी

रविशंकर शर्मा  | 30 Jul , 2021 11:00 PM
सीएजी की रिपोर्ट सदन में पेश, राजस्व घटा व व्यय में 2018-19 के मुकाबले 19-20 में हुई बढोत्तरी

रायपुर। कैग की रिपोर्ट शुक्रवार को विधानसभा में पेश की गई। रिपोर्ट से जानकारी सामने आई कि लॉकडाउन के दौरान राजस्व में करीब 14 फीसदी की कमी आई है। राजस्व व्यय 9 हजार करोड़ रुपए बढ़ गया है। विधानसभा के पटल पर सीएजी की दो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। पहली रिपोर्ट 31 मार्च 2019 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष और दूसरी रिपोर्ट 31 मार्च 2020 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष से संबंधित हैं।  रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत साल 2016 से 19 के बीच 3 सालों में राज्यांश-केन्द्रांश के राज्य नोडल खाते के लिए राज्य सरकार ने 896.22 करोड़ कम राशि जारी की है। साल 2018-19 में सरकार के पास राजस्व आय 683.76 करोड़ सरप्लस था,जबकि 2019-20 में ये 9608.61 करोड़ घाटे में तब्दील हो गया। राजस्व व्यय में साल 2018-19 के मुकाबले 2019-20 में 9066.14 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। 


राज्य शासन की ओर से 2014-18 के दौरान बजट, प्रत्याशित अनुमानों से मेल नहीं खा सका,परंतु 2018-19 के दौरान बजटीय अनुमान से अधिक्य रहा। राज्य वस्तु एवं सेवा कर के अंतर्गत भी प्राप्तियां 2017-19 के दौरान बजटीय अनुमान से अधिक्य रही। 2018-19 के दौरान राज्य के लिए राजस्व का एकमात्र सबसे बड़ा श्रोत रहा। राज्य आबकारी प्राप्तियां 2017-19 के दौरान बजटीय अनुमान से अधिक्य रही,परंतु स्टाम्प एवं पंजीकरण शुल्क एवं भू-राजस्व 2014-19 के दौरान प्रत्याशित अनुमानों से मेल नहीं खा सके। 


31 मार्च 2019 की स्थिति में विद्युत कर और शुल्क, बिक्री, व्यापार आदि पर कर, स्टाम्प और पंजीकरण शुल्क, राज्य उत्पाद शुल्क, वानिकी और वन्य प्राणी वाहन कर एवं खनिज प्राप्तियों से 8,349.95 करोड़ बकाया थे, जिसमें से 1,465.74 करोड़ 5 वर्ष से भी अधिक समय से लंबित थे। आपदा एवं राजस्व प्रबंधन विभाग की ओर से राज्य के 27 जिलों में से केवल 9 जिलों से संबंधित बकाया का विवरण ही प्रदाय किया जा सका।  निरीक्षण प्रतिवेदनों (नि.प्र.) के विश्लेषण में प्रकट हुआ कि 31 मार्च 2019 तक विभागों को जारी 2,623 निरीक्षण प्रतिवेदनों के 10,614 कंडिकाएं, जिसमें राशि 9,891.26करोड़ के संभावी राजस्व सन्निहित है। नवंबर2020 तक बकाया थे। वर्ष 2018-19 के दौरान जारी किए गए  लेखापरीक्षा के 49 निरीक्षण प्रतिवेदनों में से 28 निरीक्षण प्रतिवेदनों (57.14 प्रतिशत) के प्रथम उत्तर भी कार्यालय प्रमुख से प्राप्त नहीं हुए।


अवधि 2018-19 में28 कर निर्धारण नस्तियां, विवरणियां, प्रतिदाय, दस्तावेज, पंजियां एवं अन्य प्रासंगिक अभिलेख लेखापरीक्षा को प्रस्तुत नहीं किए गए। निरीक्षण प्रतिवेदनों में इस मुद्दे पर प्रकाश डाला गया और संबंधित विभागों के सचिवों को सूचित किया गया। किसी भी प्रकरण में कर के प्रभाव की गणना नहीं की जा सकी। लेखापरीक्षा को अभिलेख प्रस्तुत न किया जाना खतरों का सूचक है क्योंकि लेखापरीक्षा की ओर से संव्यवहारों के सत्यता की प्रमाणिकता नहीं की जा सकी और धोखाधड़ी की संभावनाओं एवं जनता के धन के दुरुपयोग से इंकार नहीं किया जा सकता।


निर्धारण प्राधिकारियों की ओर से 9 प्रकरणों में वैट की कम दर लागू की गई, जिसके परिणामस्वरूप कर की राशि 1.54 करोड़ का अवरोपण हुआ। इसके अतिरिक्त 3.08 करोड़ का शास्ति भी आरोपणीय है। कर निर्धारण प्राधिकारियों से अंतर्राज्य विक्रय, माल अंतरण, पारगमन और निर्यात विक्रय के विरुद्ध दिए गए छुट/रियायती कर की दर गलत स्वीकार किए जाने के फलस्वरूप कर1.53 करोड़ का अन/अवरोपण हुआ।
पांच क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (क्षे.प.अ.)/जिला परिवहन अधिकारियों (जि.प.अ.) ने वाहन स्वामियों से मोटरयान कर का समय पर भुगतान तय करने में विफल रहने से 471 वाहन स्वामियों से कर 1.26 करोड़ एवं शास्ति 1.26 करोड़ की वसूली नहीं हुई।


विद्युत शुल्क के विलंब से भुगतान पर मुख्य विद्युत निरीक्षक द्वारा ब्याज आरोपित करने में विफलता के फलस्वरूप ब्याज  1.24 करोड़ की अप्राप्ति। दो वनमंडलाधिकारियों की ओर से विभागीय अनुदेशों का अनुपालन न करने के कारण ग्रीन इंडिया मिशन के अंतर्गत सहायक प्राकृतिक पुनरूत्पादन कार्यों पर 1.30 करोड़ का परिहार्य व्यय हुआ। 
तीन वनमंडलाधिकारियों द्वारा कार्य योजना कोड के प्रावधानों का उल्लंघन कर वृक्षारोपण कार्य वृत के 1,418.557 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपणरहित बिगड़े वनों की पुर्नस्थापना का कार्य किया गया, जिसके फलस्वरूप दो करोड़ का अनियमित व्यय हुआ। 


विभाग द्वारा स्टॉक/कामोडेटी एक्सचेंजों के माध्यम से प्रतिभूतियों के क्रय विक्रय पर मुद्रांक शुल्क के प्राप्ति के लिए ठोस प्रयास नहीं किए गए, परिणामस्वरूप मुद्रांक शुल्क की राशि 63.71 करोड़ की प्राप्ति नहीं हो सकी। 
विलेखों के गलत वर्गीकरण, बाजार मूल्य मार्गदर्शक सिद्धांत के प्रावधानों का पालन न करने एवं दस्तावेजों में तथ्यों की अनदेखी करने के कारण मुद्रांक शुल्क एवं पंजीयन फीस की राशि 8.52 करोड़ का कम आरोपण हुआ। 
विभाग द्वारा सेवा प्रदाता को गो-लाइव प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। आगे, प्रस्तावों के लिए अनुरोधों (आर.एफ.पी.) में उल्लेखित न्यूनतम सेवा स्तर मानकों की प्राप्ति के लिए सेवा स्तर करार (एस.एल.ए) का निष्पादन भी नहीं किया गया। 


वर्ष 2017 में पहली बार सिक्यूरीटी आडिट की वैद्यता समाप्त होने के बाद कोई भी सिक्यूरीटी आडिट नहीं कराया गया। आगे आरएफपी में प्रावधान के बावजूद बायोमेट्रिक आधारित पक्षकारों/गवाहों के पहचान एवं सत्यापन के लिए कोई प्रावधान नहीं किए गए। 


सेवा प्रदाता द्वारा सिस्टम का यूजर एक्सेपटेंस टेस्टिंग (यूएटी) बगैर विभाग के भागीदारी के एकपक्षीय किया गया। यूएटी में प्रभावी भागीदारी होने से बीजनेस लॉजिक के मैपिंग में कमियों का संबोधन किया जा सकता था।   
विलेखों के आवश्यक डाटा को एकत्रित करने के लिए एकल इनपुट फार्म पर्याप्त नहीं था। आगे, एपलिकेशन में निष्पादन दिनांक की प्रविष्टि के लिए प्रावधान नहीं था। इसके चलते पंजीयन प्राधिकारी को संपत्तियों के बाजार मूल्य की गणना सही एवं निष्पादन दिनांक से निश्चित अवधि में विलेखों का प्रस्तुतीकरण सुनिश्चित करने के लिए मैनुअल रीति से करना पड़ता था।

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