GLIBS

पैदल बिहार जाने निकले थे सगे भाई, रायपुर में मिली मदद, अब रहेंगे मेहमान बनकर

रविशंकर शर्मा  | 02 Apr , 2020 09:56 AM
पैदल बिहार जाने निकले थे सगे भाई, रायपुर में मिली मदद, अब रहेंगे मेहमान बनकर

रायपुर। कांकेर जिले से बिहार अपने घर जाने निकले दो सगे भाइयों को बुधवार रात जिला प्रशासन ने लाभांडी के आश्रय स्थल पर ठहराया है। दोनों 1 हफ्ते से भटकते हुए रायपुर पहुंचे थे। हिम्मत टूटी तो एनजीओ से मदद मांगी। अब दोनों लॉक डॉउन तक राज्य के अतिथि बनकर रहेंगे। बता दें कि दोनों कांकेर में काम करते हैं। इस विषम घड़ी से परेशान होकर आखिरकार दोनों ने 25 मार्च को पैदल ही कांकेर से अपने घर बिहार के अरडिया जाने का निर्णय लिया। इस बीच कुछ दीगर साधनों का साथ मिला लेकिन वह काफी नहीं था। जैसे-तैसे रायपुर तक पहुंचे। रायपुर पहुंचने के बाद जब हिम्मत हार गए तो सहारे की तलाश में भटकते समय दोनों को देवदूत के रूप में समाजसेवी डॉ.उत्कर्ष त्रिवेदी मिले। डॉ. त्रिवेदी ने जिला प्रशासन को इस संबंध में जानकारी दी।

सूचना पर कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन और जिलालापंचायत सीईओ डॉ. गौरव कुमार सिंह ने रैपिड रेस्पॉन्स टीम और गोलबाज़ार पेट्रोलिंग टीम को भेजकर प्राथमिक सहायता मौके पर ही दी। खाना खिलाकर दोनों को लभांडी में बनाए सुविधायुक्त आवासीय परिसर में लाया गया। दोनों भाई लॉकडाउन तक अब आराम से यहीं रुकेंगे। फिर अपने घर बिहार रवाना के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी बुधवार को जरुरतमंद और बेसहारा लोगों के लिए बनाए गए इसी आश्रय स्थल का जायजा लेने पहुंचे थे। उन्होंने सारी व्यवस्थाओं की जानकारी ली थी। यहां रूके लोगों को मुख्यमंत्री बघेल ने भरोसा दिलाया था कि छत्तीसगढ़ में इस वक्त रूका हुआ बाहर का हर व्यक्ति राज्य का मेहमान है। किसी को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। सभी आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी। इस शिविर में कई राज्यों और जिलों के भटक रहे 2 सौ से अधिक लोगों को आश्रय, भोजन और सभी जरूरी सुविधा दी गई है।

Author/Journalist owns and is responsible for views/news published and the publisher/printer is in no way liable for such content.