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बादल भाइयों ये केरल नहीं छत्तीसगढ़ हैं

यामिनी दुबे  | 31 May , 2020 04:44 PM
बादल भाइयों ये केरल नहीं छत्तीसगढ़ हैं

रायपुर। मई-जून यानी सूरज का साम्राज्य। चिलचिलाती धूप का आतंक। गर्मी का कहर। आग उगलती लू की लपटें। मगर यह सब ऐसा लग रहा है कहानी किस्से की बातें हैं। आज मई का आखिरी दिन और भरी दोपहरी आसमान पर बादलों का कब्जा। काले कजरारे बादल आसमान पर अठखेलिया कर रहे हैं जैसे गर्मी नहीं बरसात का मौसम हो। उनका समय आ गया हो। उनका राज आ गया हो। सूरज का अता पता नहीं। पता नहीं दोपहर को ही किस बात से नाराज होकर किस कोने में दुबक गया है सूरज। अभी तो स्कूल भी बंद हैं किसी ने उसे स्कूल जाने के लिए भी नहीं कहा होगा।

पता नहीं किसी नटखट बच्चे सा क्यों रूठ कर कहीं छुप गया है। हवाएं झूम झूम कर सूरज की हार पर खुशी का इजहार कर रही है। और टिप टिप करती बूंदों की लड़ी अपनी ही मस्ती में एक अनोखा राग छेड़े हुए है। कल 1 जून है और मानसून 1 जून को केरल में दस्तक देता है लेकिन इस बार ऐसा लग रहा है बादलों ने छत्तीसगढ़ को केरल समझ लिया है। वे यहीं पर उतर आए हैं छत्तीसगढ़ को गर्मियों से राहत दिलाने बारिश का लंबा-चौड़ा पैकेज लिए हुए। बिजलियाँ भी कड़क चमक कर देख रही है कहीं कोई जगह सूखी तो नहीं रही गई है। आज बादलों की धमाचौकड़ी को देख कर बस इतना ही कहा जा सकता है बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाना, किस राह से बचना है, किस छत को भिगोना है।

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