GLIBS

लॉक डाउन में कोई भूखा न रहे 'आशाएं' ने ठाना है, 10 वर्षों से सेवा कार्य में अंशदान दे रहे सदस्य

रविशंकर शर्मा  | 05 Apr , 2020 10:09 PM
लॉक डाउन में कोई भूखा न रहे 'आशाएं' ने ठाना है, 10 वर्षों से सेवा कार्य में अंशदान दे रहे सदस्य

रायपुर। भूख बहुत तकलीफ दायक होती है, जब लगती है तो बहुत दर्द होता है। इस दर्द को समझने वाले लोग समाज में है। ऐसे लोगों ने लॉक डाउन में कोई भूखा न रहे यह ठान लिया है। ऐसा ही अतुलनीय सेवा कार्य में अपना अंशदान कर रही हैं संस्था 'आशाएं'। आशाएं के सदस्यों का कहना है कि इस विषम घड़ी में जिससे जो करते बने वह वो करें। देश और देश के लोगों को एक-दूसरे की जरुरत है। बता दें कि आशाएं पिछले 10 वर्षों से सामाजिक कार्य में जुटी हुई है। संस्था में यंगस्टर्स (स्टूडेंट्स/जॉब होल्डर्स/सेल्फ एम्प्लॉयड) का समूह है। बगैर किसी सरकारी मदद के संस्था के लोगों ने अब तक स्वयं की बचत से एकत्र किए गए पैसों से ही सेवा कार्य में योगदान दिया है। लॉक डाउन के लिए 'आशाएं' ने अपनी सेवा रविवार, 29 मार्च से शुरू की थी,जो निरंतर जारी है। अब तक यह संस्था रायपुर के ट्रांसपोर्ट नगर, उरला, सिलतरा, खमतराई, मेटल पार्क, धरसीवा, मंदिर हसौद, मोवा, तुलसी ग्राम, विधानसभा क्षेत्र, खूटरी विलेज, नवागांव, आजाद चौक पुलिस स्टेशन, खमतराई थाना इत्यादि जगह में सेवा कर चुकी है और लगातार कर रही है।

संस्था 3850 से अधिक तैयार पके हुए भोजन के पैकेट, 300 कच्चे राशन के पैकेट, 400 सैनिटाइजर, 250 मास्क, 1000 किलो चावल, 250 किलो गेहूं का आटा, 250 किलो आलू बैग, 250 किलो प्याज बैग, 5 टिन तेल, ग्रीष्मकालीन कपड़े आदि वितरित कर चुकी है।संस्था के गुरप्रीत सलूजा, शौर्यदित्य सिंह, धीरज सेठिया, पवन कुमार, पीयूष भाटिया, आदित्य बुधिया, परवेज फारूकी, आदर्श मुंद्रा, शादाब अली, मोहम्मद जफर, आदित्य टुटेजा, राहुल गजलवार, तरणजीत होरवात होरा, उनीता हुड्डा के साथ टीम आशाएं के सदस्य जरुरतमंद लोगों की हर तरह से सहायता कर रहे हैं। आशाएं ने अपील की है कि सभी आगे आएं और मदद करें, जितना जिससे हो सकें।

 

Author/Journalist owns and is responsible for views/news published and the publisher/printer is in no way liable for such content.