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'प्रेमचंद के फटे जूते' का मंचन और व्यक्तित्व पर कवि अरुण कमल ने दिया व्याख्यान

'प्रेमचंद के फटे जूते' का मंचन और व्यक्तित्व पर कवि अरुण कमल ने दिया व्याख्यान

धमतरी।  देश बनता है लोगों से, उनके जीवन, जीविका, समाज और संस्कृति से।  राष्ट्र तब बनता है जब लोग एक साथ होते हैं। एक साथ रहते हैं। सब एक जैसे नहीं हो सकते। विविधता राष्ट्र की पहचान है। सब एक जैसे कैसे होंगे ? होना भी नहीं चाहिए  कथा सम्राट प्रेमचंद की जयंती की पूर्व संध्या पर देश के जाने माने कवि अरुण कमल ने प्रेमचंद की लेखनी और जीवनी की व्याख्या करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के समय से देश को धर्म के आधार पर राष्ट्र को टुकड़े टुकड़े करने की षडयन्त्र करते रहे। विडम्बना यह है कि आज भी देश में कुछ लोग यह सब करने पर उतारू हैं। प्रेमचंद ने उस समय देश में गैरबराबरी, धार्मिक उन्माद के खिलाफ  और अन्याय के खिलाफ  आवाज बुलंद की थी। कवि अरुण कमल ने प्रेमचंद और वर्तमान परिदृश्य विषय पर व्याख्यान दिया। इस कार्यक्रम के दूसरे भाग में रचना मिश्र के निर्देशन में प्रेमचंद की चार रचनाओं पर आधारित हरिशंकर परसाई के व्यंग्य निबंध 'प्रेमचंद के फटे जूते' का नाट्यमंचन किया गया। नाट्य रचना सुभाष मिश्र ने तैयार की थी।  इस नाटक को सुभाष मिश्र ने एक कोलाज के बतौर प्रस्तुत किया जिनमें बीच-बीच में प्रेमचंद की कहानी और उपन्यास गोदान, कफन आदि के कुछ दृश्य शामिल थे। कार्यक्रम की शुरुआत में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के जिला प्रमुख नवनीत बेदार ने कवि अरुण कमल का परिचय दिया।    
 कार्यक्रम का संचालन धमतरी हिंदी साहित्य परिषद् की अध्यक्ष  सरिता दोशी ने किया। यह अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, धमतरी जिला हिंदी साहित्य समिति एवं छत्तीसगढ़ फिल्म एंड विजुअल आर्ट सोसाइटी का संयुक्त आयोजन था। इस कार्यक्रम में करीब ढाई सौ दर्शक आये जिनमें शिक्षकों के अलावा समाज के तमाम वर्ग के लोग शामिल थे। इस कार्यक्रम में धमतरी जिला कलेक्टर रजत बंसल शामिल हुए और नाटक भी देखा।

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