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आदित्य हॉस्पिटल में नहीं दी बिल की पूरी रकम, स्टाफ ने गिरवी रख लिया आधार कार्ड और मोबाइल

आदित्य हॉस्पिटल में नहीं दी बिल की पूरी रकम, स्टाफ ने गिरवी रख लिया आधार कार्ड और मोबाइल

महासमुंद। एक प्राईवेट हॉस्पिटल की बड़ी लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना हरकत प्रकाश में आयी है। 11 माह की जैनम खातून के माता-पिता ने शहर के बड़े आदित्य हॉस्पिटल पर आरोप लगाया है कि उनकी बच्ची को गंभीर बता कर उसे आईसीयू में भर्ती कर लिया गया और सिर्फ तीन दिन में 21 हजार रुपए का बिल बना दिया। बिल की रकम में 3 हजार रुपए कम होने पर इस गरीब माता-पिता के मोबाइल और आधार कार्ड इस अस्पताल के स्टाफ ने रख लिया और अस्पताल ने बिना प्रिपक्पिशन स्लीप के अस्पताल से चलता कर दिया। प्राईवेट अस्पताल से बच्ची को लेकर जैनम के माता पिता महासमुंद के सरकारी सौ बिस्तर हॉस्पिटल पहुंचे तो वहां के डाक्टरों ने बच्ची को देखा और कहा कि बच्ची को कुछ नहीं हुआ है सिर्फ फिवर है। सरकारी अस्पताल में बच्ची का इलाज शुरू किया गया और बच्ची मात्र 3 घंटे के भीतर ही खेलने लगी। मामला प्रकाश में आने के बाद आदित्य हास्पिटल के डॉक्टर और इस अस्पताल के प्रमुख डॉ. कालीकोटी मीडिया को बयान देने से बचते रहे। 24 घंटे तक जब डाक्टर ने बातचीत करने से बचते रहे तो मजबूरन मीडिया ने हॉस्पिटल पहुंच कर समय मांगा, तब कहीं जाकर डाक्टर ने बयान दिया और डाक्टर कालीकोटी ने मामले में अनभिज्ञता जाहिर की।

जिला अस्पताल पहुंचे मीडिया को इस मामले की जानकारी हुई तब मीडिया ने बच्ची के माता पिता से बात चित की तो चौकाने वाले मामले का खुलासा हुआ। मीडिया को बच्ची के मां जरीना बेग कोसमखुटा निवासी ने बताते हुए कहा कि 7 तारिख की रात्रि में उसकी बच्ची को तेज बुखार हो गया और झटके आने लगे तो उन्होंने अपनी बच्ची को लेकर शहर के निजी आदित्य अस्पताल रात्रि में पहुंचे। जहां इस परिवार की मुलाकात अस्पताल के डॉ. खान से हुई और उन्होंने बच्ची को तत्काल आईसीयू में भर्ती कर दिया और बच्ची के माता पिता को कहा कि बच्ची के फेफड़े-खून में इनफेक्शन हो गया है। डरे सहमें माता पिता ने अपनी बच्ची की जान की खातिर डाक्टर की बात मान ली और भर्ती करने राजी हो गये। दो दिन के भीतर बच्ची के माता पिता इस प्राईवेट अस्पताल के ही दवाखाने से लगभग 9 हजार रुपए की दवा ली। तीसरे दिन इस हॉस्पिटल के स्टाप से बिल पूछा गया तो उन्होंने 11-12 हजार बेड चार्ज बताया तो इस गरीब परिवार के होस उड़ गये और उन्होंने बच्ची को तत्काल डिस्चार्ज करने के लिए कहा, लेकिन हास्पिटल के स्टाफ ने बच्ची को डिस्चार्ज करने से मना कर दिया। बच्ची के माता पिता ने जब कहा कि हमारे पास बिल की रकम अदा करने के लिए रुपए नहीं है तब डिस्चार्ज को अस्पताल तैयार हुआ। तीन दिन में 21 हजार रुपए का बिल हास्पिटल को चुका पाना इस परिवार के लिए संभव नहीं था हिलाजा उन्होंने कहा कि अपनी आर्थिक स्थिति बताई, अस्पताल को बताते हुए कहा कि बिल की रकम पूरी नहीं है। बिल की रकम पूरी नहीं होने पर आदित्य हास्पिटल के स्टाफ ने इस गरीब परिवारे पिता की मोबाइल और आधार कार्ड लेकर कहा कि जब बिल की राशि चुका दोगे तब तुम्हे तुम्हारा मोबाईल और आधार कार्ड मिलेगा।

महासमुंद स्थित सरकारी अस्पताल के डाक्टर राकेश परदल का कहना है कि बच्ची 11 माह की है तेज बुखार आने पर झटके आते है। यह स्वाभाविक होता है इसमें डरने जैसी कौई बात नहीं होती है। बच्ची को जब जिला अस्पताल लाया गया तो उसे बुखार जरूर था लेकिन वह गंभीर नहीं थी। अस्पताल के डाक्टरों ने बच्ची को ट्रिटमेंट दिया और बच्ची का बुखार 3 घंटे के भीतर समाप्त हो गया। आईसीयू में भर्ती करने जैसी बच्ची की स्थिती नहीं थी।

 

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