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बस्तर में बापी न उवाट जाने दादी के नुस्खे एक अनोखी पहल की है भूपेश बघेल सरकार ने

यामिनी दुबे  | 15 Jul , 2021 05:23 PM
बस्तर में बापी न उवाट जाने दादी के नुस्खे एक अनोखी पहल की है भूपेश बघेल सरकार ने

रायपुर। दादी-नानी के पास बच्चों के अच्छे लालन-पालन के लिए न सिर्फ अनुभव का खजाना होता है बल्कि वह प्यार-मनुहार से बच्चों से हर छोटी-छोटी बात मनवा लेती है। आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्र दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा में बुजुर्ग महिलाओं के इन्हीं ममत्व, अनुभव और ज्ञान का उपयोग मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जा रहा है। यहां यूनिसेफ के सहयोग से स्थानीय बोली में ‘बापी न उवाट‘ अर्थात ‘जाने दादी के नुस्खे‘ के नाम से एक अभिनव पहल की गयी है। इसमें गांव की बुजुर्ग महिलाओं के माध्यम से लोगों को कुपोषण मुक्त और स्वस्थ बनाने की मुहिम शुरू की गई है। दिसंबर 2020 में शुरू किए गए इस अभियान से दंतेवाड़ा के 239 गांव की बापियो यानि बुजुर्ग महिलाओं को जिला प्रशासन से सुपोषण अभियान से जोड़ा गया है। अब ये बुजुर्ग महिलाएं (बापियां) दंतंवाड़ा में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की ब्रांड एंबेसेडर बन चुकी है।

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