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नदी में डूबे दोनों मासूम की खोह में फसीं थी लाश, 3 घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने निकाला नदी से बाहर

विष्णु कसेरा  | 25 Jun , 2019 07:22 PM
नदी में डूबे दोनों मासूम की खोह में फसीं थी लाश, 3 घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने निकाला नदी से बाहर

सूरजपुर। अपने दोस्तों के साथ रेणुका नदी में स्नान करने गए दो मासूम बच्चों की जल समाधि हो गई। गोताखोरों की मदद से 3 घंटे की मशक्कत के बाद जब दोनों मासूमों के शव को बाहर निकाला गया तो पूरा शहर फफक पड़ा। हर एक इंसान की आंखें डबडबा गई थी।

गौरतलब है कि मंगलवार को दोपहर करीब 2 बजे नगर के नया बस स्टैंड मोहल्ला निवासी सुमित साहू पिता शिवधन साहू 12 वर्ष और आयुष साहू पिता आनंद साहू 12 वर्ष अपने 5 अन्य दोस्तों के साथ छठ घाट के समीप स्थित नौकाघाट रेड नदी में स्नान करने गए थे, उसी दौरान सुमित और आयुष के गहरे पानी में चले जाने के कारण डूब गए। जबकि उनके साथ गए तीन अन्य साथी सकुशल हैं जिन्होंने परिजनों को इस घटना की सूचना दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम, परिजन और स्थानीय नागरिकों की टीम मौके पर पहुंच गई है। स्थानीय गोताखोरों ने उनकी तलाश शुरू कर दी थी। इसी दौरान पुलिस अधीक्षक जी एस जा और सीएसपी डीके सिंह की पहल पर पुलिस विभाग के गोताखोर मौके पर पहुंचे और उन्होंने संभावित ठिकानों पर तलाश शुरू की तो दोनों बच्चों की लाश पथरीले खोह में फंसी हुई थी जिसे गोताखोरों ने बमुश्किल बाहर निकाला।

कपड़ों से हुई पहचान, परिजनों का रो रो कर बुरा हाल

जिस स्थान पर सुमित साहू और आयुष साहू के डूबने की बात कही जा रही है उसी स्थान पर नदी के घाट पर उन दोनों बच्चों के कपड़े चप्पल और जूते रखे हुए हैं जो स्पष्ट है कि वे दोनों बच्चे आयुष और सुमित हैं इस घटना की सूचना जब परिजनों के पास पहुंची तो दोनों बच्चों के परिजन तत्काल घटनास्थल पर पहुंच गए और जब गोताखोरों ने दोनों मासूमों की लाश बाहर निकाली तो पूरा शहर रो पड़ा हर एक की आंखें डबडबा गई थी परिजनों का तो बहुत ही बुरा हाल था।

इसी स्थान पर होली के दिन हुआ था हादसा

बताया जा रहा है कि जहां पर वे दोनों बच्चे नहा रहे थे वहां पर गहरा खोह है जिसमें कुछ वर्षों पूर्व होली के दिन तीन बच्चों की जल समाधि हो चुकी हैं। इस हादसे के बाद रेड नदी के इस स्थल को प्रतिबंधित कर दिया गया था लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के कारण आज पुनः दो बच्चों की इसी स्थान पर जल समाधि हो गई। इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने खतरनाक बन चुकी इस खोह को प्रतिबंधित करने और सुरक्षित करने की मांग की है।

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