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तीन बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर छापामार कार्रवाई, पकड़ी करोड़ों की टैक्स चोरी

राहुल चौबे  | 03 Dec , 2019 09:30 PM
तीन बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर छापामार कार्रवाई, पकड़ी करोड़ों की टैक्स चोरी

रायपुर। प्रदेश की जीएसटी टीम ने मंगलवार को तीन व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर छापामार कार्रवाई कर करोड़ों रुपए  की टैक्स चोरी पकड़ी है। तीन जिलों में छापा मारकर तीनों संस्थानों से 8 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम रिटर्न फाइल  पूर्ण कराई है। इस कार्रवाई से छत्तीसगढ़ के व्यवसायियों में खौफ है। प्रदेश की टैक्स कमिश्नर रीना बाबासाहेब कंगाले के निर्देश पर प्रदेश के जीएसटी विभाग के संयुक्त आयुक्त गोपाल वर्मा के नेतृत्व में 15 सदस्यीय 3 समूहों द्वारा 3 डीलर्स मेसर्स सोमनाथ आयरन एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड रायपुर, मेसर्स एंड  सिनर्जी लिमिटेड रायगढ़ एवं मेसर्स ग्राण्ड कार्स प्राईवेट लिमिटेड कोरबा में दबिश देकर जांच की गई। जांच में 6 करोड़ का चेक एक करोड़ का कैश डिपाजिट और 1.4 करोड़ रुपए जमा कराकर रिटर्न फाइल जमा कराई। जानकारी के अनुसार मेसर्स सोमनाथ आयरन एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड रायपुर आयरन स्टील निर्माण एवं खरीदी-बिक्री करता है। वर्ष 2015-16 में व्यापारी द्वारा प्रवेशकर विवरणी अनुसार कुल क्रय 13.10.30,189.00 रुपए है तथा प्रस्तुत स्टॉक अनुसार कुल क्रय  4,59,73,692.00 रुपए है। यानी क्रय एवं प्रस्तुत स्टॉक के कुल क्रय में बड़ा अंतर है। साथ ही फर्म ने जून 2019 से अक्टूबर 2019 तक मासिक विवरणी प्रस्तुत नहीं किया था। व्यवसायी ने तत्काल 2 करोड़ का चेक प्रदान किया। इसी तरह मेसर्स इंड्स सिनर्जी लिमिटेड रायगढ़ आयरन ओर, कोल आदि का व्यवसाय करता है। वर्ष 2013-14 में व्यवसायी द्वारा प्रस्तुत की गई विवरणी अनुसार कुल टर्नओव्हर 2.79,54,825.00 रुपए है, जबकि स्टॉक सूची अनुसार कुल टर्नओव्हर 3,75,99,274.00 रुपए है। दोनों के बीच की राशि में भी काफी अंतर है। फर्म ने माह अक्टूबर 2019 का मासिक विवरणी भी प्रस्तुत नहीं की थी। यहां व्यवसायी ने तत्काल एक करोड़ रुपए कैश आनलाइन जमा किया। साथ ही 4 करोड़ का चेक प्रदान किया। इसी तरह कोरबा का फर्म मेसर्स ग्राण्ड कार्स प्रा.लि. चारपहिया वाहन एवं स्पेयर पाट्र्स का क्रय-विक्रय करता है। फर्म ने जुलाई 2017 से मई 2019 तक 8,80,76,660.00 रुपए की देयता दर्शाकर  9,00,56,441.00 रुपए का आईटीसी क्लेम किया है जबकि उक्त अवधि में नगद भुगतान शून्य है। साथ ही व्यवसायी ने जुलाई से अक्टूबर 2019 तक विवरणी प्रस्तुत नहीं की थी। व्यवसायी से तत्काल 1.04 करोड़ रुपए जमा कराकर रिटर्न फाइल कराया गया। जांच टीम तीनों फर्मों के जब्त दस्तावेजों का परीक्षण कर रही है।

 

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