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जोखिम में फंसे ऋण पर संशोधित दिशा-निर्देश

जोखिम में फंसे ऋण पर संशोधित दिशा-निर्देश

मुंबई। रिजर्व बैंक ने जोखिम में फंसे ऋण की समस्या से निपटने के लिए शुक्रवार को संशोधित दिशा-निर्देश जारी किया है जिसके अनुसार, यदि ऋणदाता को लगता है कि कोई खाताधारक ऋण भुगतान में चूक कर सकता है तो वह चूक से पहले भी ऋण समाधान प्रक्रिया शुरू कर सकता है। उच्चतम न्यायालय ने रिजर्व बैंक द्वारा इस संबंध में पिछले साल 12 फरवरी को जारी दिशा-निर्देश को खारिज करते हुये उसे इसके स्थान पर संशोधित दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दिया था। रिजर्व बैंक ने कहा कि अब ऋण नहीं चुकाने वालों के खिलाफ ऋण समाधान प्रक्रिया ऋण चूक से पहले भी शुरू की जा सकेगी और ऋण देने में चूक होने पर 30 दिन के भीतर समाधान प्रक्रिया की रूपरेखा तथा उसे लागू करने के तरीके तय कर लिये जायेंगे। यह 30 दिन की अवधि समीक्षा अवधि के रूप में जानी जायेगी।

रिजर्व बैंक ने गत 04 अप्रैल को इस संबंध में एक एक बयान जारी किया था जिसमें कहा गया था कि इस दिशा में आवश्यक कदम उठाये जायेंगे जिसमें संशोधित दिशा-निर्देश जारी करना भी शामिल था। इसी को ध्यान में रखते हुये केन्द्रीय बैंक ने आज नये दिशा-निर्देश जारी किए। रिजर्व बैंक ने जोखिम में फँसे ऋण को पहले की तरह ही तीन श्रेणियों में रखा है। विशेष उल्लेखित खाता (एसएमए)-शून्य में बैंक उन ऋण खातों को दिखायेंगे जिनकी किस्त 30 दिन या उससे कम अवधि के लिए बकाया है। यदि ऋण की किस्त 31 से 60 दिन तक बकाया है तो उसे एसएमए-1 श्रेणी में और 61 से 90 दिन की अवधि तक किस्त नहीं चुकाने पर खाते को एसएमए-2 श्रेणी में दिखाना होगा।

केंद्रीय बैंक ने कहा गया है कि जोखिम में फँसे ऋण की पहचान मूल धन या ब्याज भुगतान या कोई अन्य आंशिक या पूर्ण भुगतान उपरोक्त अवधि के दौरान बकाया रहेगा तब बैंकों को समाधान प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसके साथ नकद ऋण जैसे रिवोल्विंग ऋण के मामलों के लिए भी एसएमए-1 और एसएमए-2श्रेणी भी बनायी गयी है। केन्द्रीय बैंक ने कहा कि सभी बैंकों को जोखिम में फँसे ऋण के लिए बोर्ड अनुमोदित समाधान प्रक्रिया बनानी होगी। सभी बैंकों को पाँच करोड़ रुपये या इससे अधिक के कर्जदरों के बारे में जानकारी देने के लिए कहा गया है। बैंकों को पाँच करोड़ रुपये या इससे अधिक के सभी कर्जदरों के ऋण भुगतान से चुकने वालों के बारे में साप्ताहिक रिपोर्ट देनी होगी।

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