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एनबीएफसी की तरलता, ऋण उठाव बढ़ाने के लिए किये कई उपाय

एनबीएफसी की तरलता, ऋण उठाव बढ़ाने के लिए किये कई उपाय

मुंबई। अर्थव्यवस्था पर दबाव कम करने के उद्देश्य से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की तरलता और ऋण उठाव बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को कई उपायों की घोषणा की। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बुधवार को समाप्त तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक में ये फैसले किये गये। बैठक के बाद विकास एवं विनियमन पर जारी बयान में कहा गया है कि किसी एक ही एनबीएफसी को बैंकों द्वारा दिये जाने वाले ऋण की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में कोई बैंक अपनी टीयर-1 पूंजी का अधिकतम 15 प्रतिशत एक ही एनबीएफसी को दे सकता है। एनबीएफसी के अलावा अन्य क्षेत्रों की एक ही कंपनी के लिए यह सीमा 20 प्रतिशत है जिसे विशेष परिस्थितियों में बैंक के बोर्ड की सहमति से 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।

एनबीएफसी के लिए अभी अब इस सीमा को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का फैसला किया गया है। इसके अलावा वाणिज्यिक बैंक प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए एनबीएफसी के माध्यम से भी ऋण दे सकेंगे। कृषि क्षेत्र के लिए इस तरह के ऋण की सीमा 10 लाख रुपये और सूक्षम एवं लघु उद्योगों के लिए 20 लाख रुपये रखी गयी है। आवास क्षेत्र के लिए यह व्यवस्था पहले से थी जिसकी सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गयी है। बयान में कहा गया है कि निर्यात एवं रोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने और प्राथमिकता वाले चुनिंदा क्षेत्रों के लिए ज्यादा ऋण उपलब्ध कराने के लिए एनबीएफसी की भूमिका को स्वीकारते हुये यह कदम उठाया गया है।

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