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बढ़ती महंगाई के बीच रेपो रेट कम करेगा रिजर्व बैंक, विकास दर को मिलेगी रफ़्तार

ग्लिब्स टीम  | 15 Nov , 2019 10:01 AM
बढ़ती महंगाई के बीच रेपो रेट कम करेगा रिजर्व बैंक, विकास दर को मिलेगी रफ़्तार

नई दिल्ली। बढ़ती खुदरा महंगाई के दबाव के बीच रिजर्व बैंक का पूरा जोर विकास दर को रफ्तार देने पर है। आरबीआई इसके लिए चालू वित्त वर्ष में रेपो रेट में 0.40 फीसदी कटौती और कर सकता है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बोफाएमएल ने गुरूवार को एक रिपोर्ट में कहा कि एमपीसी की अगली दोनों बैठक में रेपो रेट में कटौती हो सकती है। अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर 4.62 फीसदी पहुंचने के बाद से ही आरबीआई की मौद्रिक नीति को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। इस बीच बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफाएमएल) ने अनुमान जताया है कि गिरती अर्थव्यवस्था को थामने के लिए आरबीआई कर्ज की दरों को और तर्कसंगत बनाएगा और फरवरी तक रेपो रेट में कटौती कर चार फीसदी पर ला सकता है। रेपो रेट निर्धारित करते समय आरबीआई खुदरा महंगाई आंकड़ों पर ध्यान देता है। दरअसल, जून तिमाही में विकास दर छह साल के निचले स्तर पर लुढ़ककर 5 फीसदी पहुंच गई थी और विश्लेषक अंदाजा लगा रहे हैं कि सितंबर तिमाही में यह 5 फीसदी से भी नीचे जा सकती है। ऐसे में अर्थव्यवस्था की सुस्ती तोड़ने के लिए आरबीआई दिसंबर में 0.25 फीसदी और फरवरी में 0.15 फीसदी की कटौती रेपो रेट में कर सकता है। कोटक महिंद्रा बैंक ने भी अनुमान जताया है कि विकास दर में सुस्ती के मद्देनजर आरबीआई इस साल रेपो रेट में 0.50 फीसदी कटौती कर सकता है।

कमजोर हैं महंगाई के संकेतक
रिपोर्ट में कहा गया है कि दर में इजाफे के बावजूद खुदरा महंगाई के मौलिक संकेतक कमजोर बने हुए हैं। अक्टूबर में उपभोक्ता आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) में बड़ा उछाल इसलिए भी दिखा है, क्योंकि पिछले साल की समान अवधि में काफी कम 2.2 फीसदी रहा था। इसके अलावा पिछले महीने प्याज सहित सब्जियों के दाम में बेतहाशा वृद्धि का भी सीपीआई पर असर हुआ है। अक्टूबर में गैर खाद्य उत्पादों की और गैर ईंधन क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर घटकर 3.3 फीसदी पहुंच गई, जो सितंबर में 3.7 फीसदी थी। हालांकि, राजकोषीय घाटे के 3.3 फीसदी के तय लक्ष्य से 0.50 फीसदी बढ़कर 3.8 फीसदी पहुंचने के अनुमान से सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।

2019-20 में 4 फीसदी रह सकती है खुदरा महंगाई : एसबीआई
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी शोध रिपोर्ट में कहा है कि इस साल अगस्त और सितंबर में ज्यादा बारिश होने की वजह से सब्जियों के दाम में उछाल जारी रह सकता है। इससे 2019-20 में खुदरा महंगाई की औसत दर चार फीसदी रह सकती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में अधिक वर्षा से कई खाद्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। इससे खाद्य उत्पादों की महंगाई दर तो बढ़ेगी, लेकिन कोर सीपीआई तीन फीसदी से नीचे रह सकती है। एसबीआई ने भी कहा है कि रिजर्व बैंक दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट में कटौती कर सकता है। 

 

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