ChhattisgarhRegion

नजूल जमीन पर 9 साल पुराना कब्जा होने पर ही दिया जाएगा पट्टा

Share

जगदलपुर। बस्तर संभाग के एक नगर निगम, 5 नगर पालिका परिषदों और 6 नगर पंचायतों के ऐसे हजारों गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है, जो सालों से नजूल जमीन पर झुग्गी-झोपड़ी या कच्चे मकान बनाकर रह रहे थे। राज्य सरकार अब ऐसे अवैध कब्जाधारियों को बेदखली के डर से मुक्ति दिलाते हुए उस जमीन का वास्तविक मालिकाना हक देने की तैयारी कर रही है।
इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें तय की गई हैं। सबसे अहम शर्त यह कि आवेदक के परिवार की कुल वार्षिक आय 2.5 लाख रुपए से अधिक नहीं हो। नजूल की जमीन पर अपना पुराना कब्जा साबित करने और योजना का लाभ लेने के लिए हितग्राहियों को बहुस्तरीय दस्तावेजों की जांच से गुजरना होगा। आवेदकों को पिछले 9 वर्षों का वैध बिजली बिल या राशन कार्ड, संबंधित नगरीय निकायों में जमा किए गए जलकर की रसीद, संपत्ति कर के भुगतान के दस्तावेज या रसीदें, सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया 2.5 लाख रुपए से कम का आय प्रमाण पत्र दिखाना होगा।
योजना में पात्रता के लिए निश्चित समय सीमा भी तय है। इसका लाभ उन्हीं कब्जाधारियों को मिलेगा, जिनका संबंधित नजूल भूमि पर कब्जा 20 अगस्त 2017 या उससे पहले का प्रमाणित होगा। यानी पिछले लगभग 9 साल से जो परिवार वहां लगातार निवास कर रहे हैं, वही इस योजना के दायरे में शामिल किए जाएंगे। अगस्त 2017 के बाद सरकारी या नजूल भूमि पर नया कब्जा करने वालों को पूरी तरह अपात्र माना जाएगा और उन्हें मालिकाना हक नहीं दिया जाएगा।
इसके लिए जिला नजूल शाखा को व्यापक स्तर पर सर्वे करने के निर्देश हैं । इस योजना से उन परिवारों को ज्यादा फायदा होगा, जो लंबे समय से सरकारी जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं, लेकिन कानूनी मान्यता न होने से प्रशासनिक कार्रवाई की आशंका से घिरे थे। सरकार ने मालिकाना हक देने के लिए नगरीय निकायों के हिसाब से क्षेत्रफल का निर्धारण किया है। इसके तहत निगम क्षेत्र में अधिकतम 600 वर्गफीट और पालिका-पंचायत क्षेत्रों में अधिकतम 800 वर्गफीट तक की नजूल भूमि पर काबिज लोगों को पट्टा दिया जाएगा। योजना का लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

GLIBS WhatsApp Group
Show More
Back to top button