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17-03-2019
आतंकी मसूद अजहर मामले में चीन ने बदला रवैया

नई दिल्ली। आतंकी मसूद अजहर के मामले में अब चीन का रवैया बदलता जा रहा है। अब वह कह रहा है कि इस मामले में कोई न कोई हल निकाल लेंगे। भारत में चीन के राजदूत लिओ झेंगहुई ने होली के कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह सिर्फ तकनीकी रोक है। इस बारे में और विचार किया जाएगा। भारत  को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि यह मामला सुलझ जाएगा। उन्होंने कहा कि मसूद अजहर के मामले में भारत की चिंता समझ रहे हैं। गौरतलब हो कि भारत जहां मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने को लेकर दबाव बनाए हुए है। वहीं अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने मसूद के पक्ष में चीन के वीटो के बाद अब खिलाफ  सख्त रुख अपना लिया है।

अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन अब भी इस मामले पर चीन के साथ चर्चा कर रहे हैं। यदि तीनों देशों के इस प्रयास के बावजूद भी अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित नहीं किया जाता है तो तीनों देश यूएन की यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली में इस मुद्दे पर खुली बहस के प्रस्ताव पर भी विचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने प्रस्ताव पेश कर आतंकी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की मांग की थी।

15-03-2019
फ्रांस जब्त करेगा आतंकी मसूद अजहर की संपत्ति 

नई दिल्ली। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के मामले में अब फ्रांस और अमेरिका भारत के साथ हैं। फ्रांस ने जहां आतंकी मसूद अजहर की संपत्ति जब्त करने का ऐलान किया है वहीं अमेरिका ने भी मसूद अजहर का पक्ष लेने पर चीन को सख्त चेतावनी दी है। पुलवामा में हुए आतंकी हमले के सबसे बड़े कसूरवार जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के खिलाफ फ्रांस बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है। फ्रांस ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का पक्ष लेत हुए कहा है कि वह मसूद अजहर की सारी संपत्तियां जब्त करेगा। फ्रांस ने कहा है कि आतंकवाद के साथ लड़ाई में वह हमेशा ही भारत के साथ है।

इधर अमेरिका ने भी आतंकी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचाने के लिए चीन द्वारा वीटो लगाने के कुछ घंटे बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चेतावनी देते हुए कहा है कि इससे दूसरे सदस्यों को एक्शन लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। यह अमेरिका की तरफ से चीन को बहुत बड़ा संदेश है। अमेरिका के राजयनिक ने कहा है कि अगर बीजिंग आतंकवाद से लडऩे के लिए गंभीर है तो उसे पाकिस्तान और अन्य देशों के आतंकियों का बचाव नहीं करना चाहिए। राजनयिक ने बताया कि यह एक नहीं चौथी बार है जब चीन ने ऐसा किया है। चीन को समिति को वह कार्य करने से नहीं रोकना चाहिए, जिसे सुरक्षा परिषद ने करने के लिए सौंपा है। अगर चीन अड़ंगा लगाता रहा तो जिम्मेदार सदस्यों देशों के सुरक्षा परिषद में अन्य एक्शन लेने पर मजबूर होने पड़ेगा। 

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