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26-06-2019
डॉक्टरों को इतना डर कि अपनी सुरक्षा के लिए बना ली निजी सेना, यह रखा नाम 

पटना। चमकी बुखार से हो रही मौत के कारण चर्चा में आया बिहार का मुजफ्फरपुर शहर इन दिनों एक और कारण से सुर्खियां बटोर रहा है। यहां डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम कर रखा है। शहर में निजी क्लीनिक और छोटे अस्पताल चलाने वाले डॉक्टरों ने क्यूआरटी यानी 'क्विक रिएक्शन टीम' की व्यवस्था की है। दरअसल, आए दिन डॉक्टरों के साथ मरीजों के परिजनों द्वारा मारपीट की घटनाओं की खबरें आती रहती हैं। इसको देखते हुए मुजफ्फरपुर में भी डॉक्टर डरे हुए हैं। अब अपने बचाव के लिए उन्होंने अपनी खुद की व्यवस्था कर ली है। शहर के कई डॉक्टरों ने पैसे इकठ्ठे कर क्विक रिस्पॉन्स टीम तैयार की है। इन डॉक्टरों का कहना है कि कई बार ऐसा होता है कि सूचना के बाद पुलिस काफी देर से पहुंचती है, तब तक हालात काफी बिगड़ चुके होते हैं। ऐसी स्थिति में क्विक रिस्पॉन्स टीम उनकी सुरक्षा करेगी। क्यूआरटी में 20 से 25 सुरक्षाकर्मी हैं। ये सुरक्षाकर्मी डॉक्टरों की एक कॉल पर तुरंत रिस्पांस करते हैं। इस टीम में आर्मी के रिटायर जवान होंगे। सिक्योरिटी एजेंसी के ये जवान डॉक्टरों की सुरक्षा करेंगे। इसके लिए इन्हें बाइक भी मुहैया कराई गई है। टीम में शामिल सुरक्षाकर्मी हर वक्त चौकन्ना रहता है। जैसे ही किसी डॉक्टर के पास से खतरे की सूचना आती है तो टीम के सदस्य तुरंत वहां पहुंचते हैं और मरीज के परिजनों को हिंसा करने से रोकते हैं। मुजफ्फरपुर की तर्ज पर ही मोतिहारी और सीतामढ़ी में भी डॉक्टरों ने सुरक्षा का यही कारगर तरीका अपनाया है। बड़े अस्पतालों और निजी कॉलेजों में जहां अपने सुरक्षा गार्ड तैनात हैं तो वहीं छोटे अस्पतालों ने क्यूआरटी हायर कर रखा है।

 

15-04-2019
लोगों में डर पैदा करने निर्दोषों की हत्या करते हैं नक्सली : मनीष पारेख

रायपुर। नक्सलियों के दंडकारण्य स्पेशल जोन और दरभा डिवीजन कमेटी के सचिव साईंनाथ द्वारा पत्र जारी कर दन्तेवाड़ा विधायक भीमा मंडावी को हिंदूवादी नेता बताकर उनकी हत्या करने के स्पष्टीकरण पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और नक्सल विरोधी नेता मनीष पारेख ने कहा है कि नक्सली बहाना बना रहे हैं। दन्तेवाड़ा विधानसभा और पूरे बस्तर संभाग के अधिकांश बीजेपी और कांग्रेसी नेता धार्मिक हैं, समूचे बस्तर संभाग सहित छत्तीसगढ़ में सभी धर्मों के लोग आपसी भाईचारे से रहते हैं। ऐसे में  एक आस्थावान विधायक भीमा मंडावी की नक्सलियों ने हत्या कर दी। मनीष पारेख ने कहा कि विधायक भीमा मंडावी शिक्षा के प्रति बेहद संवेदनशील और जागरूक थे। वे विधायक के तौर पर दन्तेवाड़ा विधानसभा में शिक्षा को बढ़ावा देकर ग्रामीणों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे थे। चूंकि लोगों की जागरुकता और विकास नक्सलियों के सबसे बड़े शत्रु हैं इसलिए वे बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास को बाधित करने के लिए तथा लोगों में डर पैदा करने के लिए निर्दोषों की हत्या करते हैं। मनीष पारेख ने नक्सलियों से पूछा है कि सड़क निर्माण में लगे गरीब व्यक्तियों की हत्या का क्या जवाब है नक्सलियों के पास? मुखबिरी के नाम पर निर्दोष ग्रामीणों की हत्या का क्या जवाब है? गांवों में सड़क, पानी, स्कूल, आंगनबाड़ी का विरोध क्यों करते हैं जबकि ये आवश्यकता ही नहीं अधिकार है जनता का। फागुन मेला देखने जा रहे परिवार को बम से उड़ा दिया, जिसमें दो गर्भवती महिलाओं सहित छोटी बच्ची भी थी, वे कौन से हिंदूवादी थे? मनीष पारेख ने कहा कि नक्सली बस्तर में अपना डर कायम रखने के लिए किसी की भी हत्या कर सकते हैं। नक्सली किसी विचारधारा की लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं। मनीष पारेख का कहना है कि वे आगामी दिनों में परमार्थ संस्था के जरिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनजागरण का कार्य करेंगे और नक्सलियों को बेनकाब करेंगे।

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