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15-07-2019
बाबरी मस्जिद मामला : रिटायर हो रहे जज ने मांगे 6 महीने, SC ने दिया कार्यकाल बढ़ाने का आदेश

नई दिल्ली। बाबरी मस्‍जिद विध्वंस मामले में सुनवाई कर रहे विशेष न्‍यायाधीश ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से 6 महीने का अतिरिक्‍त समय मांगा है। दरअसल इस मामले की सुनवाई कर रहे न्‍यायाधीश सितंबर में रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में सप्रीम कोर्ट ने उत्‍तर प्रदेश सरकार से विशेष न्‍यायाधीश का कार्यकाल आगे बढ़ाने के उपाय करने के लिए कहा है। जज एसके यादव ने सुप्रीम कोर्ट क पत्र लिखकर अतिरिक्त समय मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये अत्यंत जरूरी है कि सीबीआई जज एसके यादव इस मामले की सुनवाई पूरी करें और फैसला सुनाएं। कोर्ट ने कहा कि हम अनुच्छेद 142 के तहत आदेश जारी करेंगे कि उन्हें 30 सितंबर को रिटायर न किया जाए।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा कि वह नियम देखकर बताए कि किस प्रावधान के तहत सेशन जज की रिटायरमेंट की तय सीमा को बढ़ाया जाए। मामला न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की पीठ के पास सुनवाई के लिए सोमवार को आया। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि वह इस हाई प्रोफाइल मामले में फैसला आने तक विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल बढ़ाने के तरीकों के बारे में उसे 19 जुलाई तक बताएं। शीर्ष अदालत ने 19 अप्रैल 2017 को मामले की रोजाना सुनवाई कर उसे दो साल के भीतर पूरा करने का आदेश दिया था।

15-07-2019
प्रदेश के 19 प्रशासनिक अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से नोटिस, 30 दिनों के अंदर देना होगा जवाब

रायपुर। राज्य प्रशासनिक सेवा के 19 अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस दिया है। इसमें सभी अधिकारियों को 30 दिन के अंदर सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित होने और अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। मिली जानकारी के अनुसार मामला 2008 में हुए पीएससी घोटाले का है, जिसमें गड़बड़ी को लेकर वर्षा डोंगरे ने हाइकोर्ट में याचिका लगाई थी, फिलहाल ये मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से 2008 पीएससी में चयनित 147 अभ्यर्थियों को कोर्ट में उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया जाना था, इनमें से 19 अभ्यर्थियों को किन्हीं कारणवश नोटिस नहीं मिल पाया था,जिससे मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही थी। ये अभ्यर्थी वर्तमान में राज्य सेवा के विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं, जिन्हें नोटिस जारी होने के 30 दिन के अंदर या तो खुद उपस्थित होना होगा या वकील के ज़रिए अपना पक्ष रखवाना होगा।

15-07-2019
सुप्रीम कोर्ट से आसाराम को फिर लगा बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज

नई दिल्ली। यौन उत्पीड़न के मामले में जेल में बंद आसाराम को सुप्रीम कोर्ट ने एक और झटका देते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पहले मुकदमे को पूरा करने की जरूरत है और गुजरात ट्रायल कोर्ट से मामले की सुनवाई पूरी करने को कहा है।

इससे पहले ताउम्र जेल की सजा काट रहे आसाराम ने सजा पर रोक लगाने के लिए याचिका दाखिल की थी जिसे 26 मार्च 2019 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। आसाराम ने इससे पहले हाईकोर्ट में जमानत याचिका दी थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। गौरतलब है कि आसाराम पर बलात्कार और हत्या का मामला है और इसी मामले में वह जेल में बंद है। राजस्थान के जोधपुर स्थित अपने आश्रम में वर्ष 2013 में 16 साल की एक लड़की के साथ दुष्कर्म करने के मामले में जोधपुर की अदालत ने आसाराम को दोषी करार दिया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

गौरतलब है कि आसाराम और चार अन्य सह आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत छह नवंबर 2013 को पुलिस ने आरोपपत्र दायर किया था। पीड़िता ने आसाराम पर उसे जोधपुर के नजदीक मनाई इलाके में आश्रम में बुलाने और 15 अगस्त 2013 की रात उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था।

13-07-2019
मासूमों से दुष्कर्म पर राष्ट्रीय जवाबदेही तय हो : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। पिछले छह महीने में देश में बच्चियों से होने वाले दुष्कर्म की करीब 24 हजार घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत : संज्ञान लेते हुए इस पूरे मामले का परीक्षण करने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बच्चियों से दुष्कर्म की बेतहाशा बढ़ती घटनाओं से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया है और सख्त लहजे में कहा है कि वह इसके लिए निर्देश जारी करेगा ताकि ऐसे कृत्यों के खिलाफ ठोस और स्पष्ट तौर पर राष्ट्रीय जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, बच्चियों से दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं को कई अखबारों और पोर्टल की रिपोर्ट के आधार पर स्वत : संज्ञान लेने का निर्णय लिया गया। सीजेआई के अलावा जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस भी पीठ में हैं। 

पीठ ने मामले को जनहित याचिका में तब्दील करते हुए अदालत की मदद के लिए वरिष्ठ वकील वी गिरी को अमाइकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया है। पीठ ने गिरी को दिशानिर्देश बनाने में मदद करने को कहा, जिसे राज्यों को जारी किया सकता है ताकि कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग में मदद मिल सके। चीफ जस्टिस ने कहा कि हम इस पर गौर करेंगे कि क्या ऐसे मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जा सकती है। क्या ऐसे मामलों के लिए विशेष अदालत का गठन किया जा सकता है। अमाइकस क्यूरी को इन मुद्दों पर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। 

वास्तव में इस तरह की घटनाओं से आहत चीफ जस्टिस ने गत एक जुलाई को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने के लिए कहा था कि इस वर्ष एक जनवरी से लेकर 30 जून के बीच बच्चियों से दुष्कर्म के कितने मुकदमे दर्ज किए गए। साथ ही रजिस्ट्री को यह आंकड़ा भी जुटाने के लिए कहा गया था कि इन मामले में जांच किस चरण पर है। चार्जशीट दाखिल करने में कितना वक्त लगा और ऐसे कितने मामले अदालतों में लंबित हैं।

12-07-2019
सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण पर रोक लगाने से किया इनकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में मराठा समुदाय को आरक्षण संबंधी प्रावधान को बरकरार रखने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने मराठा आरक्षण कानून की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि मराठा समुदाय को 2014 से पूर्व प्रभावी तौर पर आरक्षण देने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के पहलू को लागू नहीं किया जाएगा। पीठ दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें से एक जे. लक्ष्मण राव पाटिल की थी, जिसमें उन्होंने मराठा समुदाय को आरक्षण देने संबंधी कानून को बरकरार रखने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

11-07-2019
मध्यस्थता नहीं बढ़ी आगे तो 25 जुलाई से रोजाना सुनवाई : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि इस मसले पर अदालत ने मध्यस्थता का जो रास्ता निकाला था, वह काम नहीं कर रहा है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल से रिपोर्ट मांगी है। अब 18 जुलाई तक रिपोर्ट सामने आएगी और फिर इस बात पर फैसला होगा कि इस मामले में रोजाना सुनवाई होगी या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता कमेटी से इस मसले पर रिपोर्ट भी मांग ली है. अब इस मसले की सुनवाई 25 जुलाई को होगी। पैनल को ये रिपोर्ट अगले गुरुवार तक सुप्रीम कोर्ट में जमा करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर पैनल कहता है कि मध्यस्थता कारगर नहीं साबित होती है, तो 25 जुलाई के बाद ओपन कोर्ट में रोजाना इसकी सुनवाई होगी। यानी इस मामले में मध्यस्थता जारी रहेगी या नहीं, इसका फैसला 18 जुलाई को ही हो जाएगा।

हिंदू पक्ष की तरफ से वकील रंजीत कुमार ने कहा है कि 1950 से ये मामला चल रहा है लेकिन अभी तक सुलझ नहीं पाया है। मध्यस्थता कारगर नहीं रही है इसलिए अदालत को तुरंत फैसला सुना देना चाहिए। पक्षकार ने कहा कि जब ये मामला शुरू हुआ था तब वह जवान थे, लेकिन अब उम्र 80 के पार हो गई है। लेकिन मामले का हल नहीं निकल रहा है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की बेंच कर रही है। अदालत ने कहा है कि अनुवाद में समय लग रहा था, इसी वजह से मध्यस्थता पैनल ने अधिक समय मांगा था। अब हमने पैनल से रिपोर्ट मांगी है।

गोपाल सिंह विशारद रामजन्म भूमि विवाद में एक मूल वादकार भी हैं। विशारद ने अपनी याचिका में कहा है कि इस विवाद को निपटाने के लिए आठ मार्च को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एफएम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई थी लेकिन इसमें कोई प्रगति नहीं दिख रही। विशारद ने याचिका में कहा है कि शीर्ष अदालत मामले की जल्द सुनवाई करे।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की तीन सदस्यीय पीठ से विशारद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पीएस नरसिम्हा ने कहा कि मालिकाना हक के इस विवाद को जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध किए जाने की जरूरत है।
विशारद ने याचिका में कहा है कि मध्यस्थता कमेटी की अब तक तीन बैठकें हो चुकी हैं लेकिन हल निकलने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। इसलिए शीर्ष अदालत इस पर जल्द सुनवाई करे।

11-07-2019
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर आज होगी सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई की तारीख जल्द लगाने की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करेगा। यह आवेदन मामले के एक हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की ओर से दिया गया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ आवेदन पर गुरुवार सुबह 10:30 बजे सुनवाई करेगी। मंगलवार को विशारद की ओर से चीफ जस्टिस के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए सुनवाई की तारीख जल्द लगाने की मांग की गई थी। उनका कहना है कि विवाद निपटाने में मध्यस्थता प्रक्रिया से खास प्रगति नहीं है, लिहाजा इसे मेरिट के आधार पर सुना जाए और निपटारे के लिए तारीख लगाई जाए। इस पर चीफ जस्टिस ने उन्हें आवेदन दाखिल करने को कहा था। 

मालूम हो कि कोर्ट ने इस मामले का आपसी बातचीत से हल निकालने के लिए पूर्व जज एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल का गठन किया था। गौरतलब है कि कोर्ट ने बातचीत से समाधान की संभावना तलाशने के लिए पूर्व जज एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल का गठन किया है।

विशारद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पीएस नरसिंहा ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया के पहले चरण में खास प्रगति नहीं हुई है। इसलिए वह चाहते हैं कि मामले का निपटारा करने के लिए तारीखें लगाई जाएं। जिसके बाद पीठ ने उन्हें आवेदन दाखिल करने की इजाजत दी।

मध्यस्थता के लिए 15 अगस्त तक समय
सुप्रीम कोर्ट ने इसी वर्ष 10 मई को मध्यस्थता पैनल को मामले सुलझाने के लिए 15 अगस्त तक का वक्त दिया था। पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष पेश रिपोर्ट में मध्यस्थता पैनल ने सकारात्मक परिणाम को लेकर आशा जताते हुए कुछ और वक्त मांगा था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। पीठ ने कहा था कि यह मामला वर्षों से लंबित है, ऐसे में पैनल को और वक्त देने में कोई हर्ज नहीं है।

10-07-2019
सुप्रीमकोर्ट पहुंचा कर्नाटक सियासी संकट, बागी विधायकों ने लगाया स्पीकर पर संवैधानिक फर्ज नहीं निभाने का आरोप

नई दिल्ली। कर्नाटक में सरकार बचाने की कवायद में कांग्रेस और जेडीएस जुटे हुए हैं। कुमारस्वामी सरकार का दावा है कि सरकार को किसी तरह का खतरा नहीं है। इन सबके बीच मुंबई में ठहरे हुए कांग्रेस के बागी विधायकों ने डीके शिवकुमार से अपनी जान का खतरा बताया है। बागी विधायकों की मांग पर उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कांग्रेस और जेडीएस के बागी विधायकों ने अब स्पीकर के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। विधायकों का कहना है कि स्पीकर अपने संवैधानिक कर्तव्य को निर्वाह नहीं कर रहे हैं। वो जानबूझकर उनके इस्तीफे को मंजूर करने में देरी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अब गुरुवार को होगी। 

इधर कर्नाटक के पूर्व सीएम और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि वो लोग विधानसभा परिसर में धरना देंगे और इसके साथ ही राज्यपाल से मुलाकात भी करेंगे।  मुंबई के जिस होटल रैनिसेंस में बागी विधायक रुके हुए हैं उसकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बागी विधायकों की मांग पर महाराष्ट्र स्टेट रिजर्व पुलिस फोर्स और रॉयट कंट्रोल पुलिस ने होटल रैनिसेंस की घेरेबंदी की है। बागी विधायकों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी मिली है कि सीएम एचडी कुमारस्वामी और डीके शिवकुमार होटल में तोड़फोड़ करने आ रहे हैं। इस तरह की जानकारी के बाद वो लोग डरे हुए हैं। 

कांग्रेस के बागी विधायक रमेश जरीखोली ने कहा कि वो लोग डीके शिवकुमार से नहीं मिलना चाहते हैं। वो साफ बताना चाहते हैं कि भाजपा की तरफ से किसी तरह का दबाव नहीं है। इसके अलावा बागी विधायक बी. बासवराज का कहना है कि हम शिवकुमार का अपमान नहीं करना चाहते हैं। हमें उनमें पूरा भरोसा है। लेकिन कोई न कोई वजह है जिसके बाद ये कदम उठाना पड़ा। इस बीच डीके शिवकुमार ने कहा कि वो बागी विधायकों से मिलकर ही जाएंगे। 

09-07-2019
पूर्व सीएम जयललिता को मिले उपहार मामले में दखल नहीं देगा सुप्रीम कोर्ट 

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता और दो अन्य के खिलाफ बगैर हिसाब के दो करोड़ रुपए से अधिक के उपहार लेने का मामला निरस्त करने संबंधी मद्रास उच्च न्यायालय के 2011 के आदेश में हस्तक्षेप करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति आर. भानुमति और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा है कि इस मामले में तीन में से दो आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है और उच्च न्यायालय ने यह मामला दायर करने में हुए विलंब का उल्लेख अपने आदेश में किया था। ऐसी स्थिति में 2011 के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है। बता दें कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने दो करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के उपहार लेने से संबंधित इस मामले में तीन व्यक्तियों को आरोपी बनाया था। इनमें से पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता और पूर्व मंत्री अजागु थिरूनावुक्कारासु की मृत्यु हो चुकी है और तीसरे आरोपी केए  सेनगोत्तायन इस समय तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री हैं। शीर्ष अदालत ने 2012 में इस मामले में जयललिता और अन्य को सीबीआई की याचिका पर नोटिस जारी किए थे।  जांच ब्यूरो ने उच्च न्यायालय के 2011 के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। सीबीआई ने तर्क दिया कि यह अपराध 1992 में हुआ था, यह केवल 1996 में आयकर विभाग के संज्ञान में आया और कार्रवाई के लिए तमिलनाडु के मुख्य सचिव को विधिवत् सूचित किया गया। इसमें किसी भी प्रकार की देरी नहीं हुई। यह दावा किया गया कि उच्च न्यायालय को यह देखना चाहिए कि एफआईआर में आरोप के अनुसार विस्तृत जांच यूएस, यूके और यूएई में की जानी थी और इस प्रक्रिया ने जांच को अंतिम रूप देने में काफी समय लगाया। जांच ब्यूरो ने अपनी अपील में कहा था कि उच्च न्यायालय ने इस मामले के विभिन्न पहलुओं पर कानून के अनुरूप विचार नहीं किया है। एजेंसी का यह मामला जयललिता के सन् 1991 से संबंधित है जिसमें उन्हें 2 करोड़ से अधिक के उपहार मिले थे।

05-07-2019
हरेन पंड्या हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को दोषी ठहराया

नई दिल्ली। गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पंड्या की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निचली अदालत का फैसला बरकरार रखते हुए 12 आरोपियों को दोषी ठहराया। 2011 में गुजरात हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ सीबीआई और गुजरात सरकार ने शीर्ष अदालत में अर्जी दायर की थी। 26 मार्च 2003 को हरेन पंड्या सुबह की सैर पर गए थे तभी अहमदाबाद के लॉ गार्डन इलाके में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी। उस समय ट्रायल कोर्ट ने आतंकवाद निरोधक कानून के तहत दोषियों को पांच साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा सुनाई थी। आरोपियों की अपील पर 29 अगस्त 2011 गुजरात हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के फैसले को पलटते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। सीबीआई ने 2012 में हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

दोबारा जांच की मांग खारिज

जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने एनजीओ सीपीआईएल की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें कोर्ट की निगरानी में इस हत्याकांड की नए सिरे से जांच कराने का अनुरोध किया गया था। न्यायालय ने इस हत्याकांड की नए सिरे से जांच के लिए जनहित याचिका दायर करने पर इस एनजीओ पर 50 हजार रुपए का जुमार्ना लगाया और कहा कि इस मामले में अब किसी और याचिका पर विचार नहीं होगा।

03-07-2019
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले हिंदी सहित 6 क्षेत्रीय भाषाओं में मिलेंगे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया है। आम लोगों की सुविधा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसला अब अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी और 6 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले अभी तक अंग्रेजी भाषा में ही अपलोड किए जाते रहे हैं। अब उन्हें हिंदी में भी अनुवाद कर वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। इसके साथ ही कन्नड़, असमिया, उड़िया और तेलगू जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में भी फैसला आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड होगा। यह व्यवस्था इस महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी। इस महीने के आखिरी में हिंदी और क्षेत्रीय भाषा में सर्वोच्च अदालत के फैसले अपलोड होंगे। लंबे समय से हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले हिंदी में उपलब्ध कराए जाने की मांग की जाती रही है। सूत्रों का कहना है कि फैसलों का हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तैयारी कर ली है। सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट पर अभी सिर्फ अंग्रेजी भाषा में फैसला उपलब्ध होता है। महीने के आखिर तक हिंदी सहित छह भाषाओं में फैसला वेबसाइट पर उपलब्ध होंगा। बताया जा रहा है कि इसके लिए चीफ जस्टिस ने सॉफ्टवेयर को ग्रीन सिग्नल दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट की इन हाउस इलेक्ट्रॉनिक सॉफ्टवेयर विंग इसके लिए काम कर रही है। हिंदी समेत क्षेत्रीय भाषाओं में फैसला उपलब्ध होना आम लोगों के लिए राहत की बात है। अब भाषाई मुश्किल के कारण फैसला नहीं पढ़ पाने वाले आम लोग भी अपनी भाषा में महत्वपूर्ण फैसले पढ़ सकेंगे। 

 

01-07-2019
सुप्रीम कोर्ट ने किया पीओके और गिलगित को संसदीय क्षेत्र घोषित करने संबंधी याचिका को खारिज

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और गिलगित को संसदीय क्षेत्र घोषित करने का केन्द्र को निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका दायर करने के लिए रॉ के पूर्व अधिकारी रामकुमार यादव पर 50 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया। पीठ ने याचिका को ‘कानूनी रूप से अस्वीकार्य’ बताया।

याचिका में कहा गया है कि पीओके ओर गिलगित भारत का क्षेत्र है, जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा किया हुआ है और सरकार ने इन दोनों क्षेत्रों में 24 नए विधानसभा क्षेत्र बनाए हैं। उसमें कहा गया है कि विधानसभा सीटों की भांति ही केन्द्र सरकार को पीओके और गिलगित में संसदीय क्षेत्र बनाने का निर्देश दिया जाए।

 

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