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15-04-2019
शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना माना जाएगा बलात्कार

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की एक महिला की शिकायत पर देश की शीर्ष अदालत उच्चतम न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना बलात्कार है। ऐसी हरकतें महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाती हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला नजीर बन गया है। न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और एमआर शाह की बेंच ने कहा है कि कई बार ऐसा होता है कि पीडि़ता और रेपिस्ट दोनों अपने-अपने जीवन में आगे निकल जाते हैं। वे अपने-अपने परिवारों का ख्याल रखते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसने कोई अपराध नहीं किया है। उसकी हरकतों को हमेशा अपराध माना जाएगा। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसी घटनाएं आधुनिक समाज में बढ़ रही हैं। न्यायालयीन सूत्रों के अनुसार मामला छत्तीसगढ़ का है। कोनी  बिलासपुर  की महिला ने एक डॉक्टर पर 2013 में उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था। महिला ने कोर्ट को बताया था कि वह 2009 से डॉक्टर से परिचित थी। इन दोनों के बीच प्रेम सम्बंध था। आरोपी ने महिला को शादी करने का झांसा दिया था। दोनों पक्षों के परिवार भी यह अच्छी तरह जानते थे। आरोपी ने बाद में एक दूसरी महिला के साथ सगाई कर ली, लेकिन उसने पीडि़ता के साथ प्रेम संबंध खत्म नहीं किया। उसने बाद में अपना वादा तोड़ दिया और किसी दूसरी महिला के साथ शादी कर ली।

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