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19-07-2019
बाबरी मस्जिद : ट्रायल चला रहे सीबीआई के स्पेशल जज एसके यादव का कार्यकाल बढ़ा

नई दिल्ली। बाबरी मस्जिद गिराने की साजिश के मामला में ट्रायल चला रहे सीबीआई के स्पेशल जज एसके यादव का कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जज का कार्यकाल बढाया जा रहा है ताकि वह ट्रायल पूरा कर फैसला सुना सकें। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल पूरा कर फैसला 9 महीने के भीतर सुनाया जाए। कोर्ट ने 6 महीने में मामले की सुनवाई पूरी करने को कहा है। बता दें, लखनऊ की सीबीआई अदालत में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 12 आरोपियों पर आपराधिक साजिश के तहत मुकदमा चल रहा है।

जस्टिस एसके यादव को 30 सितंबर को रिटायर होना था। जज का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा था। यूपी सरकार ने कहा है कि राज्य में किसी जज का कार्यकाल बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए कोर्ट अपने अनुच्छेद 142 के तहत अधिकार के तहत ये कर सकता है।

18-07-2019
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 2 अगस्त को होगी अयोध्या विवाद पर सुनवाई

नई दिल्ली। अयोध्या में विवादित भूमि के निपटारे के लिए बनाई गई मध्यस्थता समिति के अध्यक्ष जस्टिस कलीफुल्ला ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। रिपोर्ट का ब्योरा गोपनीय रहेगा। इस पर सुनवाई करते हुए गुरुवार (18 जुलाई 2019) को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जज ने कहा कि मामले में सुनवाई कब से शुरू होगी इस पर फैसला दो अगस्त को दिया जाएगा। सीधे शब्दों में कहें तो दो अगस्त को दोपहर दो बजे तय होगा कि रामजन्म भूमि और बाबरी मस्जिद विवाद के निपटारे के लिए नियमित सुनवाई कब से शुरू होगी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता के नतीजे 31 जुलाई तक दें।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने 11 जुलाई को इस मुद्दे पर रिपोर्ट मांगी थी। इस दौरान कोर्ट ने टिप्पणी कर कहा कि अगर कोर्ट मध्यस्थता कार्यवाही पूरी करने का फैसला करती है तो 25 जुलाई से रोजाना आधार पर सुनवाई शुरू हो सकती है। दरअसल राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले के एक पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता कमेटी से रिपोर्ट तलब की। इस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने देखा। पक्षकार सिंह ने अपनी याचिका में कहा था कि मध्यस्थता कमेटी के नाम पर विवाद सुलझने के आसार बहुत कम हैं। ऐसा इसलि है चूंकि इसमें तो सिर्फ समय बर्बाद हो रहा है, इसलिए कोर्ट मध्यस्थता कमेटी खत्म कर स्वयं सुनवाई करके मामले का निपटारण करे।

18-07-2019
कर्नाटक विधानसभा में फ्लोर टेस्ट आज, आसपास के क्षेत्र में लगाई गई धारा 144 

नई दिल्ली। कर्नाटक में बीते 15 दिन से जारी सियासी संग्राम खत्म हो सकता है। गुरुवार को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होना है, इससे साफ हो जाएगा कि एचडी कुमारस्वामी की सरकार बचेगी या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को बागी विधायकों के इस्तीफे या अयोग्य किए जाने पर फैसला लेने की छूट दे दी थी। भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस दावा कर रही है कि उनके पास बहुमत है। खबर है कि भाजपा विधायक बसों में विधानसभा पहुंचे। कुछ देर में कर्नाटक विधानसभा का सेशन शुरू होने वाला है। उनके अलावा कांग्रेस की तरफ से भी लोग पहुंच रहे हैं। विधानसभा के आसपास धारा 144 लगाई गई है । आसपास की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। विधानसभा के दो किमी. के आसपास धारा 144 लगा दी गई है।

18-07-2019
अयोध्या मामले की सुनवाई आज, मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट पर विचार संभव

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद मामले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ इस मामले में मध्यस्थता के लिए गठित पैनल की रिपोर्ट पर विचार कर सकता है। पीठ ने 11 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान मध्यस्थता पैनल से इस मुद्दे पर रिपोर्ट मांगी थी। जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि यदि मध्यस्थता प्रक्रिया किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंची तो 25 जुलाई से इस मामले की रोजाना सुनवाई होगी। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एफएमआई खलीफुल्ला के नेतृत्व में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल का गठन किया था। 

हिंदू पक्षकार ने किया था जल्द सुनवाई का अनुरोध 
एक हिंदू पक्षकार ने बीते नौ जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करते हुए आवेदन दायर किया था।पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया था कि मध्यस्थता प्रक्रिया में कोई खास प्रगति नहीं हो रही है। इसलिए जल्द सुनवाई के लिए तारीख लगाई जाए। कोर्ट ने आवेदन पर विचार करने को कहा है।

17-07-2019
पूर्व सांसद अतीक अहमद के घर और दफ्तर पर सीबीआई ने मारा छापा

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद अतीक अहमद के प्रयागराज स्थित घर पर सीबीआई ने छापा मारा। यह छापेमारी घर के अलावा अतीक के दफ्तर पर भी हुई है। बता दें कि अतीक अहमद अभी गुजरात के अहमदाबाद जेल में बंद है। दरअसल कुछ दिन पहले देवरिया जेल में एक कारोबारी की पिटाई की गई थी। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद सीबीआई ने अतीक के खिलाफ यह कार्रवाई की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने अतीक अहमद और अन्य के खिलाफ एक बिजनेसमैन के अपहरण और उनके साथ मारपीट करने का मामला दर्ज किया था और अहमद और उसके साथियों पर अपहरण, जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और डकैती की धाराओं के तहत आरोप लगाए थे।

अतीक अहमद 2004 से 2009 तक उत्तर प्रदेश के फूलपुर से 14वीं लोकसभा में समाजवादी पार्टी का सांसद था। वह पांच बार विधायक रहा और 11 फरवरी, 2017 से जेल में है। सीबीआई ने 23 अप्रैल 2019 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज किया। पिछले महीने बदमाशों और जेल प्रशासन के बीच सांठगांठ का पता लगाने के लिए सीबीआई ने देवरिया जेल के कई अधिकारियों से बिजनेसमैन के अपहरण और पिटाई के मामले में पूछताछ की थी। पूर्व सांसद अतीक अहमद और 15 अन्य के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई की यह कार्रवाई सामने आई।

17-07-2019
बागी विधायकों को विश्वास मत में हिस्सा लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक की कुमारस्वामी सरकार को करारा झटका देते हुए बुधवार को कहा कि कांग्रेस एवं जनता दल (एस) के बागी विधायकों को विश्वास मत प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि इन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता 15 बागी विधायकों को राज्य विधानसभा में कल होने वाले विश्वास मत प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार को निर्धारित समय-सीमा के तहत बागी विधायकों को इस्तीफा मंजूर करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में अध्यक्ष की भूमिका एवं दायित्व को लेकर कई अहम सवाल उठे हैं जिन पर बाद में निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल संवैधानिक संतुलन कायम करने के लिए वह अपना अंतरिम आदेश सुना रहे हैं।

17-07-2019
कर्नाटक : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, विधानसभा अध्यक्ष विधायकों के इस्तीफे पर लें फैसला

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के 15 बागी विधायकों की याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुना दिया है। फैसले में कोर्ट ने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष विधायकों के इस्तीफों पर फैसला लें। लेकिन अध्यक्ष पर किसी समस सीमा में फैसला लेने के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधायकों को भी विधानसभा में मौजूद होने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। बता दें इस फैसले से 14 महीने पहले बनी कुमारस्वामी सरकार को तगड़ा झटका लगा है। विधायकों द्वारा दायर इस याचिका में कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष को कांग्रेस-जेडीएस के बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने की मांग की गई थी। इस मामले में मंगलवार को कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि कुमारस्वामी और विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों की याचिका पर विचार करने के सुप्रीम कोर्ट के अधिकार पर सवाल उठाए हैं।

वहीं बागी विधायक विधानसभा अध्यक्ष आर रमेश कुमार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह बहुमत खो चुकी सरकार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। बागी विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ से अनुरोध किया कि इस्तीफे और अयोग्यता के मुद्दे पर यथास्थिति बनाए रखने का स्पीकर को निर्देश देने संबंधी अंतरिम आदेश जारी रखा जाएगा। रोहतगी ने कहा कि अगर विधानसभा की कार्यवाही होती है तो इन विधायकों को व्हिप के आधार पर सदन में उपस्थित रहने से छूट दी जानी चाहिए क्योंकि मौजूदा सरकार अल्पमत में हैं। मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि बागी विधायक सरकार को गिराना चाहते हैं। ये विधायक चाहते हैं स्पीकर के अधिकारों के मामले में अदालत दखल दे।

17-07-2019
कर्नाटक के बागी विधायकों की याचिका पर आज फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। कर्नाटक में कांग्रेस व जदएस के 15 बागी विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को फैसला सुनाएगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को मामले में सुनवाई की। पीठ ने बागी विधायकों, स्पीकर केआर रमेश कुमार और मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया, जिस पर सुबह फैसला सुनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान स्पीकर रमेश कुमार ने पीठ से अनुरोध किया कि अगर अदालत पिछले आदेश में बदलाव करती है तो वह बागी विधायकों के इस्तीफे और अयोग्यता का निपटारा बुधवार तक कर देंगे।

स्पीकर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि याचिकाकर्ता विधायक कोर्ट से ऐसा आदेश पारित कराना चाहते हैं जो वापस नहीं हो सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह ऐसा भी कोई मामला नहीं है जिसमें सुप्रीम कोर्ट को दखल देने की दरकार है। बागी विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ से अनुरोध किया कि इस्तीफे और अयोग्यता के मुद्दे पर यथास्थिति बनाए रखने का स्पीकर को निर्देश देने संबंधी अंतरिम आदेश जारी रखा जाएगा। रोहतगी ने कहा कि अगर विधानसभा की कार्यवाही होती है तो इन विधायकों को व्हिप के आधार पर सदन में उपस्थित रहने से छूट दी जानी चाहिए क्योंकि मौजूदा सरकार अल्पमत में हैं। मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि बागी विधायक सरकार को गिराना चाहते हैं। ये विधायक चाहते हैं स्पीकर के अधिकारों के मामले में अदालत दखल दे। 

इस्तीफा स्वीकार करना ही होगा: बागी विधायक
10 बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उनका इस्तीफा स्वीकार करना ही होगा क्योंकि मौजूदा राजनीतिक संकट से उबरने का अन्य कोई तरीका नहीं है और विधानसभा अध्यक्ष सिर्फ यह तय कर सकते हैं कि इस्तीफा स्वैच्छिक है या नहीं। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे 10 विधायकों की अर्जी पर पहले सुनवाई कर रही है। बागी विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बताया कि अध्यक्ष को सिर्फ यह तय करना है कि इस्तीफा स्वैच्छिक है या नहीं। रोहतगी ने कहा कि ह्यमैं जो भी करना चाहता हूं, वैसा कर सकूं यह मेरा मौलिक अधिकार है और अध्यक्ष द्वारा मेरा इस्तीफा स्वीकार नहीं किए जाने को लेकर मुझे बाध्य नहीं जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत होना है और बागी विधायकों को इस्तीफा देने के बावजूद व्हिप का पालन करने पर मजबूर होना पड़ सकता है। रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 10 विधायकों ने छह जुलाई को इस्तीफा दिया और अयोग्यता की कार्यवाही दो विधायकों के खिलाफ लंबित है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि ह्यआठ विधायकों के खिलाफ अयोग्यता प्रक्रिया कब शुरू हुईह्ण रोहतगी ने कहा कि उनके खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही 10 जुलाई को प्रारंभ हुई।

16-07-2019
बागी विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट कल सुबह साढ़े 10 बजे सुनाएगा फैसला

नई दिल्ली। कर्नाटक के बागी विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार सुबह साढ़े 10 बजे फैसला सुनाएगा। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पर फैसला कल सुबह सुनाया जाएगा। 
सुनवाई के दौरान बागी 10 विधायकों ने इस्तीफे मंजूर करने की दलील दी। साथ ही अयोग्यता की कार्यवाही का विरोध किया। इस दौरान सीजेआई ने पूछा कि बागी विधायकों के इस्तीफे और अयोग्य ठहराने की तारीख क्या थी। वहीं कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष के आर रमेश कुमार की ओर वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि बागी विधायकों की अयोग्यता और उनके त्यागपत्र के मामले में वह बुधवार तक निर्णय ले लेंगे। साथ ही अध्यक्ष ने न्यायालय से इस मामले में यथास्थिति बनाये रखने के पहले के आदेश में उचित सुधार करने का अनुरोध किया।

15-07-2019
बाबरी मस्जिद मामला : रिटायर हो रहे जज ने मांगे 6 महीने, SC ने दिया कार्यकाल बढ़ाने का आदेश

नई दिल्ली। बाबरी मस्‍जिद विध्वंस मामले में सुनवाई कर रहे विशेष न्‍यायाधीश ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से 6 महीने का अतिरिक्‍त समय मांगा है। दरअसल इस मामले की सुनवाई कर रहे न्‍यायाधीश सितंबर में रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में सप्रीम कोर्ट ने उत्‍तर प्रदेश सरकार से विशेष न्‍यायाधीश का कार्यकाल आगे बढ़ाने के उपाय करने के लिए कहा है। जज एसके यादव ने सुप्रीम कोर्ट क पत्र लिखकर अतिरिक्त समय मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये अत्यंत जरूरी है कि सीबीआई जज एसके यादव इस मामले की सुनवाई पूरी करें और फैसला सुनाएं। कोर्ट ने कहा कि हम अनुच्छेद 142 के तहत आदेश जारी करेंगे कि उन्हें 30 सितंबर को रिटायर न किया जाए।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा कि वह नियम देखकर बताए कि किस प्रावधान के तहत सेशन जज की रिटायरमेंट की तय सीमा को बढ़ाया जाए। मामला न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की पीठ के पास सुनवाई के लिए सोमवार को आया। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि वह इस हाई प्रोफाइल मामले में फैसला आने तक विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल बढ़ाने के तरीकों के बारे में उसे 19 जुलाई तक बताएं। शीर्ष अदालत ने 19 अप्रैल 2017 को मामले की रोजाना सुनवाई कर उसे दो साल के भीतर पूरा करने का आदेश दिया था।

15-07-2019
प्रदेश के 19 प्रशासनिक अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से नोटिस, 30 दिनों के अंदर देना होगा जवाब

रायपुर। राज्य प्रशासनिक सेवा के 19 अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस दिया है। इसमें सभी अधिकारियों को 30 दिन के अंदर सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित होने और अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। मिली जानकारी के अनुसार मामला 2008 में हुए पीएससी घोटाले का है, जिसमें गड़बड़ी को लेकर वर्षा डोंगरे ने हाइकोर्ट में याचिका लगाई थी, फिलहाल ये मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से 2008 पीएससी में चयनित 147 अभ्यर्थियों को कोर्ट में उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया जाना था, इनमें से 19 अभ्यर्थियों को किन्हीं कारणवश नोटिस नहीं मिल पाया था,जिससे मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही थी। ये अभ्यर्थी वर्तमान में राज्य सेवा के विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं, जिन्हें नोटिस जारी होने के 30 दिन के अंदर या तो खुद उपस्थित होना होगा या वकील के ज़रिए अपना पक्ष रखवाना होगा।

15-07-2019
सुप्रीम कोर्ट से आसाराम को फिर लगा बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज

नई दिल्ली। यौन उत्पीड़न के मामले में जेल में बंद आसाराम को सुप्रीम कोर्ट ने एक और झटका देते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पहले मुकदमे को पूरा करने की जरूरत है और गुजरात ट्रायल कोर्ट से मामले की सुनवाई पूरी करने को कहा है।

इससे पहले ताउम्र जेल की सजा काट रहे आसाराम ने सजा पर रोक लगाने के लिए याचिका दाखिल की थी जिसे 26 मार्च 2019 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। आसाराम ने इससे पहले हाईकोर्ट में जमानत याचिका दी थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। गौरतलब है कि आसाराम पर बलात्कार और हत्या का मामला है और इसी मामले में वह जेल में बंद है। राजस्थान के जोधपुर स्थित अपने आश्रम में वर्ष 2013 में 16 साल की एक लड़की के साथ दुष्कर्म करने के मामले में जोधपुर की अदालत ने आसाराम को दोषी करार दिया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

गौरतलब है कि आसाराम और चार अन्य सह आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत छह नवंबर 2013 को पुलिस ने आरोपपत्र दायर किया था। पीड़िता ने आसाराम पर उसे जोधपुर के नजदीक मनाई इलाके में आश्रम में बुलाने और 15 अगस्त 2013 की रात उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था।

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