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22-02-2019
पुन्नी मेला में पारंपरिक खेल रहे आकर्षण का केन्द्र 

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति अत्यंत आकर्षक है। पारम्परिक छत्तीसगढ़ी लोक खेल इसकी विशिष्ट विधाओं में से एक है। जब इसमें प्रौढ़ और बुजुर्ग भी खेलते हैं तो उनमें बचपना लौट आती है। इसी परंपरा को बनाए रखने इस वर्ष पहली बार राजिम माघी पुन्नी मेले में इसे भी स्थान दिया गया। राज्य सरकार के पर्यटन व संस्कृति विभाग द्वारा अभिनव प्रयास के रूप में इन खेलों को प्रमुख आकर्षण के रूप में आयोजित किया जा रहा है। मंत्री ताम्रध्वज साहू के इस पहल को हर किसी की सराहना मिल रही है।

लौट आया बचपन 

राजिम माघी पुन्नी मेला में गोटा, बिल्लस, सोलगोटिया, पच्चीसा, नौगोटिया खेलने छत्तीसगढ़ के दूर-दराज से मेले में आये महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। खेल-खेलने के दौरान महिलाओं ने बताया कि राजिम में आध्यात्मिक, धार्मिक के साथ-साथ मनोरंजन के लिए पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया है जो काफी सराहनीय पहल है। यह खेल-खेलकर हमें ऐसा लगा जैसे हमारा बचपन लौट आया हो। छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक खेल एशोशिएशन के अध्यक्ष व संस्थापक चंद्रशेखर चकोर ने बताया कि 19 फरवरी से 25 फरवरी तक आयोजित होने वाले पारंपरिक खेलों में किसी भी वर्ग एवं क्षेत्र के प्रतिभागी हिस्सा ले सकेंगे जिसके लिए दोपहर 12 से शाम 6 बजे तक समय निर्धारित की गई है।

26 से होगी खेलों की स्पर्धाएं

विलुप्त हो रही छत्तीसगढ़ की खेल विधा को जारी रखने राजिम माघी पुन्नी मेले में 26 फरवरी से पारंपरिक खेलों का आयोजन स्पर्धा के रूप में होगा। इसमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। 26,27 व 28 फरवरी को प्रदेश स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता होगा। इसी तरह 1 मार्च को खो-खो व लोक खेल प्रदर्शन, 2 मार्च को खो-खो के साथ गेड़ी दौड़ प्रतियोगिता व 3 मार्च को गिल्ली डंडा प्रतियोगिता एवं लोक खेल प्रदर्शन का आयोजन होगा।

 

19-02-2019
राजिम में आज से शुरू हुआ माघ पूर्णिमा का पुन्नी मेला
22-01-2019
इस बार नए स्वरूप में होगा राजिम माघी पुन्नी मेला 

गरियाबंद। राजिम कुंभ कल्प का नाम बदल जाने के बाद अब माघी पुन्नी राजिम मेले के आयोजन को लेकर कांग्रेस की नई सरकार तैयारियों में जुट गई है। मेले को भव्य बनाने रायपुर, गरियाबंद व धमतरी तीनों जिले के उच्च अधिकारी तैयारियों में जुट गए हैं। इसी कड़ी में गृह, जेल, धार्मिक न्यास, धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने आज राजिम पहुंचकर  अधिकारियों की बैठक लेकर तैयारियों का जायजा लेते हुए संगम स्थल का निरिक्षण कर आयोजन में कई बड़े बदलाव और फैसले लिए। मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति, बोली, तीज-त्यौहार और आस्था तथा भावना के अनुरूप इस बार नए स्वरूप में राजिम माघी पुन्नी मेले का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और नदियों को सुरक्षित रखते हुए  नदी से रेत न हटाएं। जरूरत के अनुसार नदी में कम से कम सड़क बनाएं। इस बार मुख्य मंच के अलावा और भी दो-तीन मंच बनाएं। एक मंच में पंडवानी, एक में राउत नाचा जैसे छत्तीसगढ़ी कार्यक्रम होंगे और मुख्य मंच में अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए। मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि प्रवचन के लिए बाहर के विद्वानों के साथ ही छत्तीसगढ़ के विद्वानों को आमंत्रित करें। कबीर पंथ, गायत्री, शंकराचार्य परम्परा के विद्वतजनों को प्रवचन के लिए बुलाएं। मेले के दौरान रोचक रामायण कार्यक्रम और छत्तीसगढ़ी खेल फुगड़ी, कबड्डी का समावेश किया जा सकता है।

 

 मेले के दौरान शराबबंदी : अमितेश शुक्ला 

 राजिम विधायक अमितेश शुक्ल ने कहा कि नदी में मुरूम की सड़क न बिछाएं। नदी में शौचालयों का निर्माण न हों। उन्होंने कहा कि इस बार कुलेश्वर महादेव एवं राजीव लोचन भगवान पर विशेष मंचन कराएं। विधायक शुक्ल ने राजिम माघी पुन्नी मेले के दौरान शराबबंदी करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। 

 

मेला स्थल का किया निरीक्षण 

संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू ने विधायक धनेन्द्र साहू और अमितेश शुक्ल के साथ मेला स्थल का निरीक्षण कर कुलेश्वर महादेव मंदिर के पास त्रिवेणी संगम पर पुन्नी स्नान के लिए व्यवस्था के साथ ही अन्य कुछ और जगहों पर भी स्नान की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। साथ ही अलग-अलग महिला एवं पुरुष घाट की व्यवस्था के लिए भी निर्देशित किया है। 

11-01-2019
CM BAGHEL : राजिम पुन्नी मेला हमारी सांस्कृतिक विरासत : सीएम बघेल

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को पत्रवार्ता ली और राजिम के पुन्नी मेले तथा सीबीआई के मुद्दे पर अपनी बात रखी। भूपेश बघेल ने कहा कि राजिम पुन्नी मेला हमारी सांस्कृतिक विरासत है। यह छत्तीसगढ़ की मेहनतकश जनता का उत्सव है। यह सदियों से हमारी समृद्ध लोक संस्कृति और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक रहा है। सीएम ने कहा कि राजिम पुन्नी मेले पर तत्कालीन भाजपा सरकार ने तब हमला किया जब उसने तमाम धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं को दरकिनार करते हुए इसे कथित राजिम कुंभ में परिवर्तित कर दिया। सीएम ने आरोप लगाया कि नाम परिवर्तन की गैरजरूरी राजनीति कर जनता के असली सवालों से ध्यान भटकाने का काम भाजपा ने पहली बार नहीं किया है। भारतीय जनता पार्टी का इतिहास इसी बात से भरा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सीबीआई के मुद्दे पर कहा किसीबीआई केंद्र सरकार की एजेन्सी है जिसे किसी भी राज्य में जांच करने के पहले राज्य सरकार की अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार ने सीबीआई को छत्तीसगढ़ में किसी भी जांच के पहले अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता से मुक्त कर दिया था। केंद्र सरकार की एजेन्सी को भी छत्तीसगढ़ में किसी भी जांच के पहले अनुमति प्राप्त करने को बाध्यता को शिथिल कर दिया था। सीबीआई को राज्य में जांच करनी है तो वह राज्य सरकार से अनुमति प्राप्त कर ले, यही संवैधानिक प्रावधान है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी की ओर इशारा करते हुए कहा कि सीबीआई की स्वायतता के साथ कौन खिलवाड़ कर रहा है। इसे पूरा देश देख भी रहा है और समझ भी रहा है। पत्रकारवार्ता में आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष एवं विधायक अमरजीत भगत, प्रदेश महामंत्री राजेश तिवारी, महिला कांग्रेस अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम, मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला, आरपी सिंह, ज्ञानेश शर्मा, किरणमयी नायक,  घनश्याम राजू तिवारी, मोहम्मद असलम, धनंजय सिंह ठाकुर, एमए इकबाल, आलोक दुबे, अभयनारायण राय, जयवर्धन बिस्सा, जितेन्द्र साहू, सुरेन्द्र वर्मा, विकास तिवारी, सुमीत दास, पीयूष कोसरे, विकास बजाज व विभोर सिंह उपस्थित थे।

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