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25-06-2019
सीबीआई के फंदे में फंस सकती है मायावती, तीन मामलों की हो सकती है सुनवाई

नई दिल्ली। केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद अब बसपा प्रमुख मायावती की मुश्किलें बढ़ सकती है। बसपा प्रमुख सीबीआई के फंदे में फंस सकती है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मायावती के शासनकाल में 21 सरकारी चीनी मिलों की बिक्री में कथित अनियमतता के मामले में तीन मामलों की नियमित रूप से सुनवाई कर सकती है। अभी तक इन मामलों की प्रारंभिक जांच चल रही थी।

साल 2011-12 के दौरान हुई इन सरकारी चीनों की बिक्री से सरकारी खजाने को कथित रूप से 1179 करोड़ रुपये के नुकसान होने की बात कही गई थी। डेक्कन क्रोनिकल की खबर के अनुसार सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर सीबीआई इन तीन प्रारंभिक जांच को नियमित केस के रूप में बदल सकती है।

सीबीआई इस मामले की जांच के तहत यूपी सरकार के कम से कम दो पूर्व वरिष्ठ नौकरशाहों से स्पष्टीकरण मांग सकती है। इसमें बताया गया कि साल 2011-12 के दौरान मायावती के शासन काल के दौरान हुई इन सरकारी चीनी मिलों की बिक्री से सरकारी खजाने को कथित रूप से 1179 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। एजेंसी ने इस मामले में कथित अनियमतता के मामले में एक एफआईआर और छह प्रारंभिक जांच रजिस्टर्ड की थी।

हालांकि, बसपा सुप्रीमो मायावती ने इन आरोपों से इनकार करते हुए केंद्र पर चुनाव के दौरान सीबीआई के दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि उनके शासन काल के दौरान हुई इन 21 चीनी मिलों की बिक्री को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। इससे पहले पिछले साल 12 अप्रैल को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच की अनुशंसा की थी।

07-05-2019
तेज बहादुर के नामांकन रद्द के फैसले पर कल सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट वाराणसी से समाजवादी पार्टी प्रत्याशी तेज बहादुर यादव के नामांकन को रद्द करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ  दाखिल याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा। ज्ञात हो कि बीएसएफ  से बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को समाजवादी पार्टी ने वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया था लेकिन उनका पर्चा खारिज हो गया था। वाराणसी के निर्वाचन अधिकारी ने तेज बहादुर यादव को नामांकन के बाद नोटिस जारी किया था और उसका जवाब देने को कहा था। जवाब देने में असमर्थ रहने के बाद तेज बहादुर का नामांकन खारिज कर दिया गया। इसके बाद तेज बहादुर ने दावा किया था कि उनका पर्चा गलत तरीके से रद्द किया गया। बाद में तेज बहादुर यादव ने पर्चा खारिज करने के चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि आयोग को अपने फैसले पर विचार करना चाहिए। अब इस मामले पर बुधवार को सुनवाई होगी। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट में तेज बहादुर यादव का पक्ष रखेंगे। बता दें कि तेज बहादुर यादव पहले निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ  चुनाव लड़ रहे थे। बाद में समाजवादी पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी बना दिया। तेज बहादुर से पहले सपा के टिकट पर शालिनी यादव पीएम मोदी के खिलाफ  ताल ठोक रही थीं। तेज बहादुर का नामांकन रद्द होने के बाद सपा की पूर्व घोषित प्रत्याशी शालिनी यादव अब वाराणसी से मैदान में हैं।

 

07-05-2019
न्यू स्वागत विहार मामले में हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर की सुनवाई

रायपुर। न्यू स्वागत विहार मामले में मंगलवार को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर हाईकोर्ट ने पीडि़तों द्वारा दायर की गई अवमानना याचिका पर सुनवाई की है और बिल्डर को निवेशकों से बैठक कर सहमति बनाने का निर्देश दिया है। 

न्यू स्वागत विहार भू-स्वामी कल्याण समिति के अध्यक्ष अनिल राव ने बताया कि न्यू स्वागत विहार डूंडा में 3 हजार निवेशकों ने जमीन खरीदी थी। इसमें पीडि़तों ने बिल्डर के विरूद्ध अवमानना याचिका हाईकोर्ट में लगाई थी। इसमें हाईकोर्ट ने पहले भी पीडि़तों के पक्ष में सुनवाई की थी और आज भी हाईकोर्ट ने पीडि़तों के पक्ष में सुनवाई करते हुए बिल्डर को 6 हफ्तें का समय दिया है। वहीं बिल्डर द्वारा जमीन को लेकर जो नक्शा बनाया गया था उसमें कुछ निवेशकों की जमीन छोटी पड़ रही है, तो उससे चर्चा कर आवेदक से सहमति बनाने के लिए कहा गया है। 6 सप्ताह में मामले का निराकरण करने को कहा है।

07-05-2019
10 मई को डॉ.पुनीत गुप्ता की अग्रिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

रायपुर। डॉ. पुनीत गुप्ता की अग्रिम जमानत को खारिज करने के लिए रायपुर पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें रोस्टर की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई तारीख आगे बढ़ा दी। अब इस मामले की सुनवाई 10 मई को होगी। 
बता दें कि तीन दिन पहले ही एडिशनल एसपी प्रफुल्ल ठाकुर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें पुनीत गुप्ता के खिलाफ गंभीर अपराध और पर्याप्त सबूत के आधार पर अग्रिम जमानत की याचिका को खारिज करने की बात कही गई है। लेकिन रोस्टर की वजह से सुनवाई की तारीख टल गई। मामले की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में 10 मई को होगी। वहीं डॉ. पुनीत गुप्ता को एक और नोटिस जारी कर उन्हें तलब किया जा रहा है, जिससे सभी सवालों का जवाब लिया जा सके।

01-05-2019
मार्च माह में हुई उपभोक्ता फोरम में सबसे ज्यादा सुनवाई, 100 उपभोक्ताओं को मिली राहत

रायपुर। छत्तीसगढ़ उपभोक्ता फोरम ने मार्च में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। मार्च माह में 484 केस दायर किए गए थे। इसमें से 102 पर फैसला उपभोक्ता के पक्ष में दिया गया है। वही राजधानी रायपुर में 82 का निराकृत कर दिया गया है, जो 20 लाख रकम में केस दायर किया गया था। सभी जिलों की बात की जाए तो 20 जिलों में 7080 केस आए थे 261 केस को तत्काल खारिज भी कर दिया गया था। 7341 केसों को फ़ाइल किया गया और अब तक 341 पर सुनवाई हो गई है। साथ ही 7000 केस पेंडिंग है। मिली जानकारी के अनुसार 90 दिनों में 75 केसों की सुनवाई हुई थी। 150 दिनों में 19 अभी तक 102 शिकायतों की सुनवाई की जा चुकी है। वही शिकायतों की बात किया जाए तो बैंक के मामले 72 है, जिसमे से 12 की सुनवाई हो गई है। मेडिकल में 51 शिकायतों में 7 पर विचारधीन और एक कि सुनवाई हुई है। वही घर लेनदेन सम्बंदित मामले सबसे ज्यादा आए हैं। इसमें 36 पर विचार किया जा रहा है साथ ही 14 कि सुनवाई की जा चुकी है। अन्य मामलों में 90 शिकायत किया गया है। 38 पर विचारधीन है और 44 कि सुनवाई की जा चुकी है। टोटल पेंडिंग मामले 494 विचारधीन में 117 और 102 कि सुनवाई की जा चुकी है।

लोगों को जागरूकता के लिए लगाए जाते है शिविर

उपभोक्ता फोरम जिला व राज्य स्तरीय शिविर लगाकर लोगो को जागरूक करने के लिए हाल ही में किया गए प्रयास के बाद मामले खुल कर सामने आने लगे है। बताया जा रहा है कि मामलों की सुनवाई अधिकतर उपभोक्ता के पक्ष में ही किया जाता है। बारीकी से देख कर सही न्याय मिलने से उपभोक्ता ठगे जाने से कई बार बच रहे है। 

रेलवे के मामले में शिकायत कम

उपभोक्ता को जब रेलवे डिपार्टमेंट ने एक व्यक्ति को ठगने का मामला सामने आया तो  उपभोक्ता फोरम ने मामले दर्ज कराने के लिए रेलवे के पास भी शिविर लगा कर जागरूकता फैलाने का काम जनवरी माह में किया था। तब से अभी तक रायपुर जिले में 23 मामले सामने आए है। इसमें दो पर विचार किया जा रहा है एक कि सुनवाई हो चुकी है। इसमें उपभोक्ता को ठगे जाने वाले मामले पर 1 लाख का जुर्माना लगाया गया था। 

शिकायत की प्रक्रिया आसान

उपभोक्ता फोरम में अगर आप न्याय चाहते है तो तत्काल आप 10 रुपये का फार्म लेकर शिकायत कर सकते हैं। अपना पक्ष स्वयं को रखना होता है। जिसके बाद आप को एक निर्धारित दिनांक मिलने के बाद बुलाया जाता है साथ ही, जिसके खिलाफ आप शिकायत किए रहते हैं। दोनों पक्षो को सुनने के बाद फैसले पर न्यायाधीश विचार करते हैं।

 

30-04-2019
राबड़ी देवी ने सीएम नीतीश कुमार को कह दिया दुष्कर्मियों का संरक्षक 

पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालूप्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बलात्कारियों का संरक्षक होने का गंभीर आरोप लगाया है। खुद प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकीं राबड़ी देवी ने कहा है कि सत्ता के संरक्षण में मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीडऩ कांड हुआ और दुष्कर्मियों को इन्होंने बचाने में मदद की। राबड़ी देवी ने पीएम मोदी के बारे में कहा कि उन्होंने भी कभी इस कांड की निंदा नहीं की। राबड़ी देवी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि मोदी और नीतीश तो बलात्कारियों के संरक्षक हैं। नीतीश पर इस कांड की जांच भी चल रही है। इन्हें बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद जांच अधिकारी को रातों-रात बदला गया और यहां आकर यह फर्जी आदमी प्रवचन दे रहा है। कुछ शर्म बची है कि नहीं। आजतक मोदी इस कांड पर नहीं बोले। राबड़ी देवी के इस बयान का आरजेडी ने समर्थन किया है। पार्टी के सांसद मनोज झा ने कहा कि नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड पर जुबान नहीं खोल पा रहे हैं। बालिका गृह कांड का कॉल डिटेल जारी नहींं कर रहे, क्योंकि उनके लोग इसमें शामिल हैं। राबड़ी देवी ने सही कहा कि इनकी टीम में बलात्कारी और अपराधी शामिल हैं। वहीं, आरएलएसपी के नेता माधव आनंद ने भी राबड़ी के बयान को सही बताया है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड मामले ने देश में बिहार को शर्मसार किया है। अदालत भी बिहार सरकार को फटकार लगा चुकी है। एक मंत्री को इस्तीफा तक देना पड़ा है। इससे साफ पता चलता है कि राबड़ी देवी का बयान बिल्कुल सही है। बता दें कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीडऩ कांड में नीतीश सरकार की मंत्री मंजू वर्मा को इस्तीफा देना पड़ा था। मंजू वर्मा के पति चंद्रेश्वर वर्मा पर भी इस कांड में शामिल होने का आरोप लगा है। हाल में ही मंजू वर्मा आम्र्स एक्ट के एक मामले में जेल से बाहर आई हैं। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस की सुनवाई फिलहाल दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में चल रही है

30-04-2019
राबड़ी देवी ने सीएम नीतीश कुमार को कह दिया दुष्कर्मियों का संरक्षक 

पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालूप्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बलात्कारियों का संरक्षक होने का गंभीर आरोप लगाया है। खुद प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकीं राबड़ी देवी ने कहा है कि सत्ता के संरक्षण में मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीडऩ कांड हुआ और दुष्कर्मियों को इन्होंने बचाने में मदद की। राबड़ी देवी ने पीएम मोदी के बारे में कहा कि उन्होंने भी कभी इस कांड की निंदा नहीं की। राबड़ी देवी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि मोदी और नीतीश तो बलात्कारियों के संरक्षक हैं। नीतीश पर इस कांड की जांच भी चल रही है। इन्हें बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद जांच अधिकारी को रातों-रात बदला गया और यहां आकर यह फर्जी आदमी प्रवचन दे रहा है। कुछ शर्म बची है कि नहीं। आजतक मोदी इस कांड पर नहीं बोले। राबड़ी देवी के इस बयान का आरजेडी ने समर्थन किया है। पार्टी के सांसद मनोज झा ने कहा कि नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड पर जुबान नहीं खोल पा रहे हैं। बालिका गृह कांड का कॉल डिटेल जारी नहींं कर रहे, क्योंकि उनके लोग इसमें शामिल हैं। राबड़ी देवी ने सही कहा कि इनकी टीम में बलात्कारी और अपराधी शामिल हैं। वहीं, आरएलएसपी के नेता माधव आनंद ने भी राबड़ी के बयान को सही बताया है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड मामले ने देश में बिहार को शर्मसार किया है। अदालत भी बिहार सरकार को फटकार लगा चुकी है। एक मंत्री को इस्तीफा तक देना पड़ा है। इससे साफ पता चलता है कि राबड़ी देवी का बयान बिल्कुल सही है। बता दें कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीडऩ कांड में नीतीश सरकार की मंत्री मंजू वर्मा को इस्तीफा देना पड़ा था। मंजू वर्मा के पति चंद्रेश्वर वर्मा पर भी इस कांड में शामिल होने का आरोप लगा है। हाल में ही मंजू वर्मा आम्र्स एक्ट के एक मामले में जेल से बाहर आई हैं। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस की सुनवाई फिलहाल दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में चल रही है

30-04-2019
सूदखोर रूबी सिंह तोमर की जमानत याचिका पर आज होगी सुनवाई

रायपुर। सूदखोर रूबी सिंह तोमर ने जमानत के लिए कोर्ट में याचिका दायर की है। जिससे आज जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। वहीं रूबी तोमर के एक साथी कमल कुर्रे को जमानत मिल गई है। बता दें कि सूदखोरी की आड़ में अवैध उगाही कर करोड़ों की संपत्ति बनाने वाले रूबी सिंह तोमर की चल-अचल संपत्ति की पूरी जानकारी जुटा ली गई है। गौरतलब है कि रूबी तोमर समेत उसके दो साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जिससे एक आरोपी कमल कुर्रे ने शादी का हवाला देकर अंतरिम जमानत ले ली है। वहीं उसके दूसरे साथी विनोद चौरसिया की जमानत अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दी है। पिछले दिनों पुलिस ने सूदखोर रूबी सिंह तोमर के घर व कार सहित ढेÞरों दस्तावेज जब्त किए। इसमें एक ऐसा रजिस्टर भी मिला है, जिसमें कर्ज लेने वालों में पुलिस जवान से लेकर कॉलगर्ल तक के नाम शामिल हैं। वहीं मामले में आरोपी बनाए गए उसका छोटा भाई रोहित सिंह तोमर, पत्नी सुब्रा और मां समेत अन्य फरार हैं, जिसकी तलाश की जा रही है। वहीं कोतवाली सीएसपी देवचरण पटेल ने बताया कि रूबी सिंह के संपत्ति को कुर्क करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए संपत्ति कुर्क करने का आवेदन कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर ली है। पुलिस अफसरों का कहना है कि संपत्ति कुर्क करने का आदेश कोर्ट से मिलते ही पूरी संपत्ति को जिला प्रशासन नीलाम करेगा। इससे प्राप्त रकम को कोर्ट की अनुमति लेकर पीड़ितों को लौटाई जाएगी।

 

 

25-04-2019
हाईकोर्ट में होगी उपभोक्ता फोरम मामले की सुनवाई 

रायपुर। उपभोक्ता फोरम मामले की सुनवाई तीन दिनों तक अब हाईकोर्ट में चलने वाली है। राज्य में मामले अधिक होने व राज्य में उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाने व उनका हक दिलाने कोर्ट एक शिविर के जरिये जागरुकता अभियान चलाने तैयार है। आज से 27 अप्रैल तक उपभोक्ता अपनी शिकायत बिलासपुर में लगे शिविर व पुराने मामले की सुनवाई की जानकारी ले सकते हंै। बताया जा रहा है कि यह शिविर उपभोक्ता फोरम दूसरी बार लगाया है,  ताकि लोगों को इस ओर जागरूक किया जा सके। जानकारी के अनुसार सोमवार से पंडरी स्थित उपभोक्ता फोरम में सुनवाई की प्रक्रिया जारी कर दी जाएगी। वहीं मार्च  माह में उपभोक्ताओं द्वारा  शिकायत वाले मामले में  102 पर निराकरण भी कर दिया गया है। अप्रैल में मामले की कमी आई है।  लोगों को जागरूक करने व उनके अधिकार दिलाने के लिए कोर्ट ने अखबारों, टीवी व अन्य माध्यमों से जागरुकता लाने की बात कही है।

 

16-04-2019
Supreme Court : सुप्रीमकोर्ट ने की मायावती की याचिका खारिज, बैन के खिलाफ जल्द सुनवाई से किया इनकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती की दायर याचि​का को खारिज कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार याचिका पर जल्द सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग के प्रचार पर रोक लगाने के फैसले को चुनौती दी थी। इस मामले को ऐडवोकेट दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया था, लेकिन अदालत ने मायावती को फौरी तौर पर राहत देने से इनकार कर दिया। मायावती के चुनाव प्रचार करने पर आयोग ने 48 घंटे की रोक लगाई हुई है।
चुनाव आयोग ने अलग-अलग आदेश जारी कर कहा था कि दोनों को चुनाव प्रचार करने से ‘रोका गया है।’ मायावती ने देवबंद में मुस्लिमों से अपील की थी कि एक पार्टी विशेष को वोट नहीं दें। इसे लेकर उन्हें नोटिस जारी किया गया था। चुनाव आयोग ने कहा कि बसपा प्रमुख ने प्रथमदृष्ट्या आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है।
आदित्यनाथ ने मेरठ में एक रैली को संबोधित करते हुए ‘अली’ और ‘‘बजरंग बली’ की टिप्पणी की थी जिसपर उन्हें नोटिस जारी किया गया था। 

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