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CBI : दो दिन में सीबीआई चीफ आलोक वर्मा की दोबारा छुट्टी, 5 कारणें से जानिए क्यों...

विनेश दीक्षित  | 11 Jan , 2019 10:25 AM
CBI : दो दिन में सीबीआई चीफ आलोक वर्मा की दोबारा छुट्टी, 5 कारणें से जानिए क्यों...

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई डायरेक्टर के तौर पर बहाली के दो दिन के भीतर सिलेक्शन कमिटी ने आलोक वर्मा को पद से हटा दिया। पीएम मोदी की अगुआई वाली और कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे व सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एके. सीकरी की सदस्यता वाली हाई-पावर्ड कमिटी ने सीवीसी जांच रिपोर्ट के आधार पर वर्मा की डायरेक्टर पद से हमेशा के लिए छुट्टी कर दी। आइए जानते हैं क्यों हो गई सीबीआई चीफ  की दोबारा छुट्टी।  

1. प्रधानमंत्री की अगुआई वाले सिलेक्शन पैनल ने वर्मा के खिलाफ सीवीसी की बेहद गंभीर टिप्पणियों का संज्ञान लिया। सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने आरोप लगाया था कि वर्मा ने मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मामले की जांच को प्रभावित करने के लिए सतीश बाबू सना से 2 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी। सीवीसी ने अपनी जांच में वर्मा के आचरण को 'संदेहास्पद' और प्रथमदृष्टया ही उनके खिलाफ केस पाया। 

2. रेलवे के 2 होटलों का ठेका देने से जुड़े लालू प्रसाद यादव के खिलाफ जांच के मामले में भी वर्मा पर गंभीर आरोप थे। आरोपों के मुताबिक, वर्मा ने इस मामले में पुख्ता सबूतों के बावजूद एक वरिष्ठ अधिकारी को बचाया और जांच में उनका नाम हटा दिया। 

3. सिलेक्शन कमिटी हरियाणा के एक जमीन घोटाले के मामले में भी वर्मा पर लगे आरोपों को काफी गंभीर प्रकृति का पाया। इस मामले में शुरूआती जांच को बंद करने को सुनिश्चित करने के लिए कथित तौर पर 36 करोड़ रुपये में सौदा हुआ। वर्मा पर आरोप है कि वे हरियाणा के तत्कालीन टाउन ऐंड कंट्री प्लानिंग के डायरेक्टर और एक रियल एस्टेट कंपनी के संपर्क में थे। सीवीसी ने इस मामले में 'आगे की जांच की जरूरत' बताई। 

4. आलोक वर्मा पर यह भी आरोप था कि जब वह 2016 में दिल्ली पुलिस के कमिश्नर थे तो उन्होंने कस्टम डिपार्टमेंट द्वारा पकड़े गए एक गोल्ड स्मगलर को बचाया था। वर्मा ने कथित तौर पर गोल्ड स्मगलर को पुलिस सुरक्षा में बाहर निकालने का निर्देश दिया था। सीवीसी ने जांच में इन आरोपों को 'आंशिक रूप से पुख्ता' पाया और सीबीआई की एक अन्य शाखा द्वारा इसकी जांच की सिफारिश की। 

5. वर्मा पर यह भी आरोप थे कि उन्होंने दागी अफसरों को सीबीआई में लेने की कोशिश की थी। वर्मा ने कथित तौर पर 2 दागी अफसरों को सीबीआई में लाने की कोशिश की थी, जबकि दोनों के खिलाफ प्रतिकूल रिपोर्ट थे। सीवीसी ने इन आरोपों को 'पुख्ता' पाया।