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Drone : ग्रेनेड गिराने सेना के जवान बना रहे हैं ड्रोन, अब तक प्रयोग सफल

विनेश दीक्षित  | 12 Jan , 2019 09:31 AM
Drone : ग्रेनेड गिराने सेना के जवान बना रहे हैं ड्रोन, अब तक प्रयोग सफल

नई दिल्ली। भारतीय सेना न सिर्फ नवीकरणीय उद्योगों को प्रोत्साहित कर रही है बल्कि उसके जवान खुद भी नवाचार गढ़ रहे हैं। ऑपरेशनल एरिया की जरूरतों को देखते हुए जवानों ने कई इनोवेशन किए गए हैं जिन्हें आरटेक सेमिनार ( आर्मी टेक्नॉलजी सेमिनार) में डिस्प्ले किया गया। आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने भी इनोवेशन पर जोर देते हुए कहा कि मिलिट्री अफेयर्स में अगली क्रांति टेक्नॉलजी और टेक्नॉलजी में इनोवेशन से ही तय होगी। जनरल रावत ने कहा कि हमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और बिग डेटा ऐनालिटिक्स पर काम करना चाहिए। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस को लेकर अभी भी धुंधलापन है। अगर हमने अभी इस दिशा में काम करना शुरू नहीं किया तो बहुत देर हो जाएगी क्योंकि दुनिया में कई देश और हमारे विरोधी देश भी इसमें आगे बढ़ रहे हैं और बड़ी रकम खर्च कर रहे है। 

2 किलो तक की आईईडी गिरा सकते हैं

आरटेक सेमिनार में ग्रेनेड रिलीज मैकेनिजम के साथ क्वाडकॉप्टर (चार रोटर्स वाला अनमेन्ड हेलिकॉप्टर यानी ड्रोन) भी डिस्प्ले किया गया है। इसे सिपाही गुरप्रीत ने तैयार किया है। इसे यूनिट में भी असेंबल किया गया। कुछ वक्त पहले तक क्वॉडकॉप्टर को निगरानी रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था लेकिन इसमें मॉडिफिकेशन कर इसमें वेपन सिस्टम जोड़ा गया है। अब इससे ऑपरेशन एरिया में किसी टारगेट को बर्बाद करने के लिए ग्रेनेड रिलीज कर सकते हैं। एक साथ यह तीन ग्रेनेड गिरा सकता है या फिर 2 किलो तक की आईईडी भी इससे गिराई जा सकती है। इमरजेंसी सिचुएशन में फर्स्ट ऐड भी इससे ड्राप कर सकते हैं। 

कश्मीर में दो किया प्रयोग

इस आर्म्ड ड्रोन का इस्तेमाल अब तक 2 बार कश्मीर की ऑपरेशनल एरिया में किया गया है। एक बार बॉर्डर पार भी इसका इस्तेमाल हुआ है। यह रिमोट के जरिए कंट्रोल होता है और इसे ऑटोमेटेड मोड पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। मैप पर लोकेशन सिलेक्ट कर यह ड्रोन तय जगह पर ग्रेनेड गिरा कर वापस आ सकता है। ग्रेनेड की रेडियस 8 मीटर तक है। इसमें विजन डिवाइस भी है और नाइट विजन भी है। ताकि रियल टाइम अपडेट मिलता रहे।