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Strike : सैकड़ों इन्टक कार्यकर्ता हड़ताल में हुए शामिल

शुभांकर रॉय  | 08 Jan , 2019 05:12 PM
Strike : सैकड़ों इन्टक कार्यकर्ता हड़ताल में हुए शामिल

भिलाई। केन्द्र सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ  इन्टक सहित 10 राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों के 8 एवं 9 जनवरी के हड़ताल के पहले दिन मंगलवार कोव ए इंटक महासचिव के बघेल के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बोरियागेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में बीएसपी कर्मियों का भी समर्थन मिला। इस दौरान ड्यूटी जाने वाले कर्मियों से इंटक नेताओं ने समर्थन देने की अपील की। इन्टक कार्यकर्ताओं एवं संयंत्रकर्मियों को संबोधित करते हुए इंटक महासचिव एसके बघेल ने कहा कि केंद्र सरकार के अनावश्यक  हस्तक्षेप के कारण कर्मियों का वेज रिवीजन एवं पेंशन रुका हुआ है। कर्मियों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। केंद्र सरकार के संरक्षण में सेल प्रबंधन हमारी सुविधाओं एवं भत्तों में कटौती कर रहा है।  इस दौरान यूनियन के उपाध्यक्ष पीजूषकर, आरसी अग्रवाल, शोभाभल्लापी, के चौधरी, संतोष किचलु, राजेंद्र पिल्ले, रमेश तिवारी, एनएस बंछोर, चंद्रशेखर, पी वी राव, संजय साहू, वंश बहादुर सिंह सहित सैकड़ों की संख्या में यूनियन व बीएसपी कर्मी उपस्थित थे।

बैंकों और बीमाकर्मियों की हड़ताल से सेवाएं  प्रभावित

ट्रेड यूनियन के आह्वान पर मंगलवार को बैंक व एलआईसी कार्यालयों में भी कामकाज ठप रहा। बैंककर्मी व बीमाकर्मियों ने अपने-अपने ब्रांच के गेट पर हड़ताल का बोर्ड लगाकर केंद्र सरकार के खिलाफ  विरोध प्रदर्शन किया। बीमा कर्मियों ने एलआईसी कार्यालय के समक्ष धरना दिया। एलआईसी के प्रमोद नायर ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार व मूल्यवृद्धि पर रोक लगाने, बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए ठोस उपाय करने, श्रम कानून को कड़ाई से लागू करने, मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा लागू करने, न्यूनतम मजदूरी पंद्रह हजार सुनिश्चित करने, श्रमिकों को न्यूनतम पेंशन तीन हजार रुपए मासिक देने, उद्योगों का विनिवेश बंद करने, ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगाने, ट्रेड यूनियन का निबंधन 45 दिनों में करने, श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी सुधार बंद करने तथा रेलवे बीमा व रक्षा के क्षेत्र में एफडीआई लागू नहीं करने के खिलाफ  देशव्यापी हड़ताल को भिलाई में समर्थन मिला। बीमा व बैंककर्मियों की हड़ताल से ग्राहकों को परेशानी हुई। बैंकों में निकासी व निवेश का काम नहीं हो सका।