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Exclusive : फर्जी दस्तावेजों से जमीन बेचने का प्रयास, असली मालिक की शिकायत पर पकड़े गए आरोपी

रोहित बन्छोर  | 13 Jun , 2019 06:09 PM
Exclusive : फर्जी दस्तावेजों से जमीन बेचने का प्रयास, असली मालिक की शिकायत पर पकड़े गए आरोपी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में फर्जी पावर आफ अटर्नी, फर्जी ऋण पुस्तिका और फर्जी आधार कार्ड बनाकर जमीन खरीदने बेचने का बड़ा रैकेट संचालित हो रहा है। जो जमीन के असली मालिकों को चूना लगा रहा है। ताजा मामला मंदिर हसौद थाने का है, जहां पर एक व्यापारी रामअवतार अग्रवाल की जमीन थी, जिसे फर्जी पावर ऑफ अटर्नी, ऋृण पुस्तिका और फर्जी आधार कार्ड के माध्यम से बेचने की कोशिश की गई। धोखाधड़ी करने वालों का मामला उस वक्त खुल गया जब फर्जी दस्तावेज बनाने वालों ने असली जमीन मालिक रामअवतार अग्रवाल के ही एक करीबी व्यक्ति को यह जमीन बेचने का प्रयास किया। फिलहाल धोखाधड़ी करने वाले पुलिस की गिरफ्त में हैं और बाकी लोगों की तलाश की जा रही है। माना जा रहा है कि जमीन के इस खेल को अंजाम देने का एक बड़ा रैकेट छत्तीसगढ़ में संचालित हो रहा है, जो लोगों को नकली दस्तावेज के आधार पर धोखे से जमीन बेचने का काम करता है। 

 

 

 


                                                      

 


                                                   



अग्रवाल की शिकायत के बाद पुलिस हुई सजग

शिकायतकर्ता रामअवतार अग्रवाल ने मंदिर हसौद थाने में शिकायत की है कि व्यक्तियों ने फर्जी और कूट रचित खास मुख्ययारनामा बनाकर निजी भूमि को बेचने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि उनकी कृषि भूमि मंदिर हसौद में है, जिसका प.ह.न. 16 में दर्ज है। इसका कुल खसरा नंबर 7 है और कुल रकबा 1585 हेक्टेयर, जिसका ऋण पुस्तिका क्रमांक 0491493 है, जो राजस्व रिकार्ड में दर्ज हैं। श्री अग्रवाल ने कहा कि मैंने अपनी जमीन का कोई किसी भी बाहरी व्यक्ति को खास मुख्तयारनामा बनाकर नहीं दिया है। श्री अग्रवाल बताया कि इस भूमि को बेचने का प्रयास फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से किया गया। श्री अग्रवाल ने बताया इसका पता तब चला जब मेरे परिचित को यह जमीन बेचने का प्रयास किया। उन्होनें बताया कि मेरे पूर्व परिचित विवेक चंद्राकर का फोन मेरे भाई नरसिंह अग्रवाल के पास आया और पूछा गया कि उक्त जमीन बेचना चाह रहे हैं क्या? जमीन विक्रय के संबंध में मेरे पास कुरुद निवासी योगेश विश्वकर्मा, भुवनदास माणिकपुरी आया है व साथ में रामअवतार अग्रवाल की ओर से खास मुख्यतायारनामा, आधार कार्ड, ऋण पुस्तिका की प्रतिलिपि भी लाए है। परिचित विवेक चंद्राकर ने मेरे भाई से पूछा कि आप ये जमीन बेचना चाहते हैं। तब मेरे भाई नरसिंह अग्रवाल ने कहा कि हमने कोई पावर ऑफ एटर्नी  भूमि विक्रय के लिए किसी को नहीं दी है। उन्होंने कहा कि आप उपरोक्त लोगों से पेपर लेकर बाद में आने को बोलो। तब परिचित विवेक चंद्राकर ने योगेश, विश्वकर्मा, भुवनदास माणिकपुरी से सभी दस्तावेज ले लिया और तहकीकात कर बताउंगा बोलते हुए वापस भेज दिया। मेरे परिचित ने इसकी छायाप्रति मुझे दी। श्री अग्रवाल ने बताया मैंने मूल दस्तावेज स मिलान किया तब स्पष्ट हुआ की योगेश, विश्वकर्मा, भुवनदास माणिकपुरी द्वारा मेरे परिचित विवेक चंद्राकर को दिए गए सभी दस्तावेज फर्जी और कूट रचित है। वहीं श्री अग्रवाल ने बताया कि भुवनदास मानिकपुरी द्वारा बनाया गया खास मुख्तयारनामा फर्जी है। इसमें मेरे हस्ताक्षर नहीं है और नही मै इन्हे जानता हूं। ऋण पुस्तिका और आधार कार्ड भी पूर्ण रूप से फर्जी और कूट रचित है।